सूचना के अधिकार कानून से बाहर हो सेना

आर.के. सिन्हा जरा एक बात पर गौर करें कि सूचना के अधिकार की आड़ में भारतीय सेना की तैयारियों को लेकर कुछ खास तत्वों में उत्सुकता किसलिए हो सकती है? क्या सेना के कामकाज की जानकारियां सार्वजनिक करनी चाहिए? सेना से संबंधित जानकारियां सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत सेना की विभिन्न इकाइयों, एजेंसियों तथा […]

Continue Reading

मां की ममता दुनिया के किसी मंडी में नही बिकती

मदर्स-डे विशेष -Nitu Sinha, Editor मां, हर बच्चों के लिए खास ही नहीं बल्कि उनकी पूरी दुनिया होती है। होना भी लाजिमी है बच्चे जन्म लेने से कई माह पहले ही अपनी मां से जुड़ जाते हैं। सभी बच्चों के जन्म लेने के बाद रिश्तों से जुड़ते हैं मगर मां और बच्चे का संबंध सारे […]

Continue Reading

विदेशी मुद्रा भंडार की गाथा

नीरज सिंहकिसी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार आखिर कितना महत्वपूर्ण होता है? कोई भी दो देश एक बराबर नहीं हैं, तो फिर किसी खास देश के लिए न्यूनतम विदेशी मुद्रा कितनी होनी चाहिए ताकि उसका काम सुचारू रूप से चलता रहे और अर्थव्यवस्था नकारात्मक ना हो? जाहिर सी बात है आज की तारीख में […]

Continue Reading

केजरीवाल जी, मत खाई पैदा करो महाराष्ट्र-गुजरात में

–आर.के. सिन्हा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को महाराष्ट्र-गुजरात के घनिष्ठ संबंधों के बारे में अभी भी बहुत कुछ जानना-सीखना है। आई.आई.टी. में इन विषयों की पढाई तो होती नहीं, तो वे यह सब जानेगें कहाँ से I उन्होंने अपने हलिया गुजरात दौर के समय भारतीय जनता पार्टी पर तंज करते हुए कहा कि “गुजरात भाजपा […]

Continue Reading

भ्रष्टाचारियों के चेहरे से नकाब उतारने का संकल्प लें युवा

–मनोज कुमार श्रीवास्तवभ्रष्टाचार की गंगा की सफाई उतनी आसान नहीं है जितना लोग आसानी से सोंचते है।यदि आज के मुठी भर भी युवा पीढ़ी भ्रस्टाचारिओं के चेहरे से पर्दा उतारने का संकल्प ले लें तो देर-सबेर देश से भ्रष्टाचार अवश्य समाप्त हो जाएगा।किसी न किसी को तो इस दिशा में पहल करनी ही होगी।पूरा का […]

Continue Reading

मजदूर वह ईकाई हैं, जो हर सफलता का अभिन्न अंग हैं

मजदूर दिवस (1 मई स्पेशल) मुरली मनोहर श्रीवास्तव मेहनत उसकी लाठी हैं,मजबूती उसकी काठी हैं।बुलंदी नहीं पर नीव हैं,यही मजदूरी जीव हैं।मजदूर का मतलब हमेशा गरीब से नहीं होता हैं, मजदूर वह ईकाई हैं, जो हर सफलता का अभिन्न अंग हैं, फिर चाहे वो ईंट-गारे में सना इन्सान हो या ऑफिस की फाइल्स के बोझ […]

Continue Reading

था बूढ़ा पर वीर बांकुड़ा कुंवर सिंह मर्दाना था

– मुरली मनोहर श्रीवास्तव“था बूढ़ा पर वीर बांकुड़ा कुंवर सिंह मर्दाना था, मस्ती की थी छिड़ी रागिनी, आजादी का गाना था, भारत के कोने-कोने में होता यही तराना था……”आज भी इस तरह के लोग परंपराओं में रची बसी बाबू कुंवर सिंह के वीरता की कहानी किसी न किसी रुप में याद जरुर करते हैं। 1857 […]

Continue Reading

याद रखना बाबा साहेब के उन अनाम साथियों को

–आर.के. सिन्हा डॉ. भीमराव अंबेडकर ने 27 सितंबर,1951 को पंडित जवाहरलाल नेहरु की केन्द्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। दोनों में हिन्दू कोड बिल पर गहरे मतभेद उभर आए थे। बाबा साहेब ने अपने इस्तीफे की जानकारी संसद में दिए अपने भाषण में दी। वे दिन में तीन-चार बजे अपने सरकारी आवास वापस आए। वे […]

Continue Reading

हिन्दी से क्यों परहेज कांग्रेस को

–आर.के. सिन्हा देश के आठ पूर्वोतर राज्यों के सभी स्कूलों के दसवीं कक्षा तक में पढ़ने वाले बच्चों को हिन्दी अनिवार्य रूप से पढ़ाने पर वहां के सभी राज्य सरकारें राजी हो गईं हैं I 22 हजार हिन्दी के अध्यापकों की भर्ती की जा रही है तथा नौ आदिवासी जातियों ने अपनी बोलियों की लिपि […]

Continue Reading

भारत में जवाबदेही कानून की सख्त जरूरत

मनोज कुमार श्रीवास्तव नौकरशाह अपनी प्रवृत्ति से बाज आये और मंत्री,नेता अपने निजी स्वार्थों से ऊपर उठे तभी लोक सेवाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकती है।अन्यथा कानून कितना भी आकर्षक,प्रभावशाली और सख्त बन जाये,यदि उसके अमल में ईमानदारी और तार्किकता न हो तो वो बेअसर ही रहेगा।एक बार बन जाने के बाद […]

Continue Reading