कला साहित्य,संगीत,, शिक्षा दर्शन एवं आधुनिक भारत निर्माण मे रबिन्द्रनाथ टेगोर का योगदान” विषय पर संवाद कार्यक्रम

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कोटा: राजकीय सार्वजनिक मणडल पुस्तकालय कोटा मे गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टेगोर की 161 वीं जयंती पर “कला,साहित्य,संगीत शिक्षा दर्शन एवं आधुनिक भारत निर्माण मे रबिन्द्रनाथ टेगोर का योगदान” थीम पर डॉ एस.आर. रंगानाथन कंवेशनल सभागार मे संवाद कार्यक्रम सम्पन्न हुआ जिसमे मुख्य अतिथि डॉ. अनिता वर्मा एसोशियेट प्रोफेसर (हिंदी) राजकीय महाविधालय कोटा, अध्यक्षता सीमा घोष शिक्षाविद एवं समाजसेविका , विशिष्ट अतिथि डॉ प्रितिमा व्यास पुस्तकालय अध्यक्ष अकलंक कॉलेज कोटा रहे ।

डॉ दीपक कुमार श्रीवास्तव मण्डल पुस्तकालयाध्यक्ष ने कहा कि – गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टेगोर एक प्रसिद्ध कवि, लेखक, नाटककार, संगीतकार, दार्शनिक, समाज सुधारक और चित्रकार थे जो मानवता एवं प्रकृति प्रेम मे अटूट आस्था रखते थे जिसका परिणाम ही था उनके द्वारा स्थापित शांति निकेतन । जिसमे गुरुकुल की भांति शिक्षा व्यवस्था प्रक़्रति के बीच पेड के नीचे दी जाती है । वह मानवता को राष्ट्रीयता से भी उपर रखते थे ।

    इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ अनिता वर्मा ने कहा कि – “गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टेगोर ने बांग्ला साहित्य के ज़रिये भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नई जान डाली। वे एकमात्र कवि हैं जिनकी दो रचनाएं दो देशों का राष्ट्रगान बनीं। भारत का राष्ट्रगान जन-गण-मन और बांग्लादेश का राष्ट्रगान आमार सोनार बांग्ला गुरुदेव की ही रचनाएं हैं।

        अध्यक्षता कर रही सीमा घोष ने कहा कि – “साहित्य की शायद ही ऐसी कोई विधा है, जिनमें उनकी रचना न हो - गान, कविता, उपन्यास, कथा, नाटक, प्रबंध, शिल्पकला, सभी विधाओं में उनकी रचनाएं विश्वविख्यात हैं। उनकी रचनाओं में गीतांजली, गीताली, गीतिमाल्य, कथा ओ कहानी, शिशु, शिशु भोलानाथ, कणिका, क्षणिका, खेया आदि प्रमुख हैं।‘

        विशिष्ट अतिथि डॉ प्रितिमा व्यास ने कहा कि - गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टेगोर एक अच्छे अनुवादक भी थे उन्होंने कई किताबों का अनुवाद अंग्रेज़ी में किया। अंग्रेज़ी अनुवाद के बाद उनकी रचनाएं पूरी दुनिया में फैली और मशहूर हुईं।

        कार्यक्रम संयोजिका शशि जैन ने सभी अतिथियों का आभार जताते हुये कहा गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टेगोर कि कविता की पंक्तिया - मेरा शीश नवा दो अपनी, चरण-धूल के तल में।देव! डुबा दो अहंकार सब, मेरे आँसू-जल में। से कार्यक्रम सम्पन्न किया । इस अवसर पर कोमल , भाविका वर्मा , किरण मीणा , बंटु सिंह , सुरेन्द्र सिंह एवं श्रीनाथ शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किये ।

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