आज से भक्त करेंगे बाबा का जलाभिषेक, कारोबारियों को भी इसबार बड़ी उम्मीद

देश

– सुनील कुमार, देवघर

बिहार-झारखंड की सीमा दुम्मा  में  राजकीय श्रावणी मेला 2022 का उद्घाटन किया गया। सबसे पहले बॉर्डर पर वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ है सांसद निशिकांत दुबे और कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने पूजा अर्चना की इसके बाद फीता काटकर और नारियल फोड़कर कांवरियों के लिए पथ को खोल दिया गया इसके बाद उद्घाटन स्थल पर दीप प्रज्वलित करें राजकीय श्रावणी मेला 2022 की शुरुआत की गई । द्वादश ज्योतिर्लिंगो में से एक बाबा बैजनाथ कि नगरी यहां सावन और भादो माह में लाखों लाख श्रद्धालु बाबा बैजनाथ पर जल अर्पण करने पहुंचते हैं विगत 2 वर्षों से विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला कोरोना महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था वहीं इस वर्ष श्रावणी मेला लग रहा है जिसको लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है वहीं आज बिहार झारखंड दुम्मा बॉर्डर पर इस मेले का विधिवत उद्घाटन भी किया गया ।

गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि श्रावणी मेला राजनीति करने की जगह नहीं है उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा कर इन्होंने वैश्विक महामारी के बाद मंदिर को खुलवाया था क्योंकि यह जानते हैं कि मेला का आयोजन होने से और बाबा मंदिर खुलने से ही यहां की रोजी रोटी चलती है इसके अलावा उन्होंने कहा कि बड़ा दुख का विषय है कि 2 सालों में सरकार ने एक बार भी श्राइन बोर्ड की बैठक नहीं की सांसद ने कहा की तैयारियां अच्छी है जिला प्रशासन को 2 महीने तक इस व्यवस्था को कायम रखना है वहीं कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि श्रावणी मेला के आयोजन को लेकर सरकार गंभीर है आज मेले का उद्घाटन किया गया है सरकार जिला प्रशासन के साथ मिलकर कांवड़ियों के लिए बेहतर व्यवस्था की रणनीति तैयार की है जिसे लागू किया जा रहा है श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी और लगातार सरकार के द्वारा इसकी मॉनिटरिंग भी की जाएगी 2 साल के बाद इस मेले का आयोजन हो रहा है और भीड़ भी काफी बढ़ेगी ऐसे में जिला प्रशासन को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए है।

कारोबारियों को है बड़ी उम्मीद

देवघर में श्रावणी मेला का आयोजन 2 साल के बाद होने जा रहा है और इस बार के श्रावणी मेला से व्यवसायियों को काफी उम्मीद है सब कुछ सही रहा तो 2 साल से मंदी के शिकार होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों को जो आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा था उससे काफी हद तक निजात मिल जाएगी लेकिन इसमें सबसे बड़ी समस्या प्रशासन द्वारा शहर के सभी इंट्री पॉइन्ट पर नो एंट्री करने से है चेंबर ऑफ कॉमर्स से डीसी की एक बैठक भी संपन्न हुई जिसमें इनकी प्रमुख मांगे थी कि शहर में गाड़ियों का आवागमन सुनिश्चित किया जाए ताकि होटल का व्यवसाय फिर से पुनर्जीवित हो सके फिलहाल इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। देवघर में सबसे बड़ा कोई व्यवसाय है तो वह है बाबा मंदिर से संबंधित व्यवसाय जिसमें प्रमुख रुप से पेड़ा प्रसाद और होटल व्यवसाय है । 2 साल से श्रावणी मेला का आयोजन नहीं रहने से होटल सहित अन्य व्यवसाय काफी प्रभावित हुए हैं दूसरी तरफ जिला प्रशासन के द्वारा पिछले कई सालों से शहर में नो एंट्री जोन बना दिया जाता है जिससे आने वाले श्रद्धालु शहर में गाड़ियों से प्रवेश नहीं कर पाते और इसका सीधा असर होटल व्यवसाय पर पड़ता है होटल व्यवसायियों का कहना है कि पूरे शहर में नो एंट्री जोन बना दिया जाता है जिससे आने वाले श्रद्धालु अपनी गाड़ी लेकर शहर में प्रवेश नहीं कर पाते और इसके कारण होटल में ठहरना इनके लिए मुमकिन नहीं हो पाता व्यवसाई जिला प्रशासन से अनुरोध कर रहे है। कि एक निश्चित रूट लाइन बनाया जाए जहां से गाड़ियां होटल तक पहुंच सके होटल में पार्किंग की व्यवस्था होटल संचालक करेंगे इसके अलावा शहर में कई जगह पार्किंग बनाए जा सकते है।

होटल व्यवसायी चैंबर सदस्य जितेश राज्यपाल ने बताया कि

देवघर के होटल कारोबारी और अन्य प्रतिष्ठान लगातार जिला प्रशासन पर नो एंट्री को हटाने की मांग कर रहे है। ऐसे में देवघर डीसी के द्वारा संथाल परगना चेंबर ऑफ कॉमर्स के सभी सदस्यों को बुलाकर एक बैठक भी की गई हालांकि बैठक में निर्णय तक नहीं पहुंचा गया लेकिन इनके मांगों को संज्ञान में रखा गया है देवघर डीसी मंजूनाथ भजंत्री का कहना है। कि होटल व्यवसाय काफी प्रभावित हुआ है। लेकिन शहर में नो एंट्री जोन नहीं बनाने से श्रद्धालुओं को काफी दिक्कत होती है। ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी बढ़ जाती है लेकिन व्यवसाय को बढ़ाना भी जरूरी है। ऐसे में इनके मांगों को संज्ञान में लेते हुए 2 से 3 दिनों में निर्णय तक पहुंचा जाएगा जिससे श्रावणी मेला का सफल संचालन भी हो सके और व्यवसाय भी प्रभावित ना हो

 देवघर के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि कुल मिलाकर 3 से 4 सालों के बीच होटल व्यवसाय काफी प्रभावित हुआ है। श्रावणी मेला में होटल का व्यवसाय काफी अच्छा चलता था लेकिन नो एंट्री रहने के कारण वैसे भक्त जो अपने चार पहिया वाहन से देवघर आकर होटलों में ठहरते थे और बाबा के दर्शन करते थे उन्हें खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिसके कारण होटल व्यवसाय काशी मंदा हो गया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि श्रावणी मेले में जिला प्रशासन क्या निर्णय लेती है। चेंबर ऑफ कॉमर्स और सभी कारोबारियों की निगाहें अब डीसी के फाइनल आदेश पर टिकी हुई है।

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