RBI की मौद्रिक नीति की हुई समीक्षा, रेपो रेट 0.5 से बढ़कर 5.4 प्रतिशत हुआ

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जीडीपी वृद्धि दर अनुमान 2022-23 के लिये 7.2 प्रतिशत पर बरकरार
2023-24 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान

नई दिल्ली:  चालू वित्त वर्ष की चौथी मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार तीसरी बार नीतिगत दर बढ़ाई गई है। भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को खुदरा महंगाई को काबू में लाने के लिये रेपो रेट को 0.5 प्रतिशत बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत कर दिया है। कुल मिलाकर 2022-23 में अब तक रेपो दर में 1.4 प्रतिशत की वृद्धि की जा चुकी है। प्रमुख नीतिगत दर महामारी-पूर्व के स्तर पर पहुंच गई है। अगस्त, 2019 में रेपो दर 5.4 प्रतिशत पर थी। साथ ही मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने नरम नीतिगत रुख को वापस लेने पर ध्यान देने का भी निर्णय किया है।

प्रमुख नीतिगत दर (रेपो) 0.5 प्रतिशत बढ़ाकर 5.4 प्रतिशत की गयी। लगातार तीसरी बार वृद्धि। मुद्रास्फीति को काबू में लाने के बाद अब तक रेपो दर में 1.40 प्रतिशत की वृद्धि। जीडीपी वृद्धि दर अनुमान 2022-23 के लिये 7.2 प्रतिशत पर बरकरार। आर्थिक वृद्धि दर 2022-23 की पहली तिमाही में 16.2 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.2 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 4.1 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.0 प्रतिशत पर रहने की संभावना। वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान। वित्त वर्ष 2022-23 के लिये खुदरा मुद्रास्फीति के अनुमान को भी 6.7 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में मुद्रास्फीति 7.1 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.4 प्रतिशत, चौथी तिमाही में 5.8 प्रतिशत और 2023-24 की पहली तिमाही में पांच प्रतिशत रहने का अनुमान। देश से 2022-23 में तीन अगस्त तक 13.3 अरब डॉलर की निकासी। वित्तीय क्षेत्र मजबूत है और उनके पास पर्याप्त पूंजी है। रुपये के मूल्य में गिरावट अमेरिकी डॉलर में तेजी की वजह से न कि भारतीय अर्थव्यवस्था के वृहत आर्थिक बुनियाद के कमजोर होने से। आरबीआई रुपये की स्थिरता बनाये रखने के लिये सतर्क रहेगा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर चार अगस्त तक 4.7 प्रतिशत घटी है। देश में वैश्विक स्तर पर विदेशी मुद्रा का चौथा सबसे बड़ा भंडार। भारत में अपने परिवारों की ओर से बिजली और शिक्षा के भुगतान के लिये अनिवासी भारतीयों को भारत बिल भुगतान प्रणाली का उपयोग करने की अनुमति देने के लिये व्यवस्था बनायी जाएगी। मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 28-30 सितंबर, 2022 को होगी।

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