- बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने प्रेस वार्ता में दी जानकारी
- पुल का स्पैन टूटने के बाद आरसीडी के एनएच डिविजन के कार्यपालक अभियंता को किया गया निलंबित
पटना, 04 मईः विक्रमशिला सेतु का एक स्पैन क्षतिग्रस्त होकर गंगा नदी में गिर गया, जिसके बाद पुल पर आवागमन फिलहाल बंद कर दिया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि पुल का कोई पिलर क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है और आगामी तीन महीनों के भीतर इसे दुरुस्त कर फिर से चालू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
यह जानकारी बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष सह सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने सोमवार को सूचना भवन के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। इस अवसर पर पथ निर्माण विभाग की विशेष सचिव शैलजा शर्मा, आईपीआरडी निदेशक अनिल कुमार सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
घटना के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) के एनएच डिविजन के कार्यपालक अभियंता को निलंबित कर दिया गया है।
वैकल्पिक यातायात व्यवस्था
प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए हैं:
- पश्चिम दिशा से आने वाले वाहन अब मुंगेर होते हुए श्रीकृष्ण सेतु के रास्ते जाएंगे
- पूर्व दिशा से आने वाले वाहनों को खगड़िया होकर गुजरने की सलाह दी गई है
- इसके अतिरिक्त, गंगा नदी पार करने के लिए स्टीमर सेवा भी शुरू की गई है, जिससे छोटे वाहनों का आवागमन संभव हो सके
जांच और पुनर्निर्माण कार्य
घटना के कारणों की जांच के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना और पथ निर्माण विभाग के विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजा गया है। साथ ही, मरम्मत कार्य में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) की सहायता भी ली जा रही है।
भविष्य की योजना
अधिकारियों के अनुसार:
- तीन महीने के भीतर क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत पूरी कर ली जाएगी
- सेतु के समानांतर एक चार लेन का नया पुल भी इस वर्ष के अंत तक तैयार होने की संभावना है
हादसे में टली बड़ी दुर्घटना
3 मई की देर रात लगभग 12:45 बजे पुल में दरार देखी गई थी। तत्परता दिखाते हुए भागलपुर ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन ने तुरंत वाहनों को पुल से हटवा दिया। कुछ ही देर बाद पुल का स्पैन नदी में गिर गया। प्रशासन की इस मुस्तैदी से एक बड़ा हादसा टल गया और कई लोगों की जान बच गई।
यह घटना जहां एक ओर पुलों के रखरखाव पर सवाल खड़े करती है, वहीं प्रशासन की तत्परता और त्वरित निर्णय क्षमता ने संभावित बड़ी त्रासदी को टाल दिया। अब तीन महीनों में मरम्मत कार्य पूरा कर यातायात बहाल करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

