शिक्षक दिवस (5 सितंबर 2026) के अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त करने और वित्त रहित शिक्षकों के लिए अलग वेतनमान की व्यवस्था करने की घोषणा की है।
बिहार के वित्तरहित शिक्षकों के लिए ऐतिहासिक दिन: सीएम सम्राट चौधरी ने की वेतनमान की घोषणा, प्रो. नवल किशोर यादव का संघर्ष लाया रंग
पटना: बिहार के शिक्षा जगत से एक बेहद राहत भरी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वित्तरहित शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करते हुए उनके लिए ‘वेतनमान’ लागू करने की घोषणा कर दी है। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही दशकों से चले आ रहे वित्तरहित शिक्षकों के संघर्ष को आखिरकार उसकी मंजिल मिल गई है।
वर्षों के इंतजार का सुखद अंत बिहार में वित्तरहित शिक्षक लंबे समय से बिना स्थायी वेतन ढांचे के काम कर रहे थे। उनका जीवन घोर आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच गुजर रहा था। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा वेतनमान की घोषणा ने इन हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों के जीवन में एक नई रोशनी भर दी है। शिक्षा जगत के जानकारों का मानना है कि इस फैसले से न केवल शिक्षकों का आर्थिक सशक्तिकरण होगा, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में भी गुणात्मक सुधार आएगा।
सड़क से सदन तक की लड़ाई: प्रो. नवल किशोर यादव की अहम भूमिका
इस मुकाम तक पहुंचने की कहानी केवल एक घोषणा की नहीं बल्कि एक लंबे और अथक संघर्ष की है। इस पूरे आंदोलन में शिक्षकों की सबसे बुलंद आवाज बनकर उभरे शिक्षक नेता और एमएलसी प्रो. नवल किशोर यादव।
प्रो. नवल किशोर यादव ने इस मांग को लेकर
शिक्षकों के साथ किया कदमताल: उन्होंने हर धरने, प्रदर्शन और आंदोलन में शिक्षकों का मजबूती से साथ दिया।
सदन में उठाई आवाज: सड़क पर संघर्ष करने के साथ-साथ विधान परिषद (सदन) में भी सरकार के सामने पूरी बेबाकी और तथ्यों के साथ वित्तरहित शिक्षकों का पक्ष रखा।
निरंतर संवाद: सरकार और शिक्षकों के बीच एक मजबूत सेतु का काम किया, जिसके परिणामस्वरूप यह ऐतिहासिक फैसला संभव हो सका।
शिक्षकों में जश्न और आभार का माहौल
इस बहुप्रतीक्षित घोषणा के बाद पूरे राज्य के वित्तरहित शिक्षकों में हर्ष की लहर दौड़ गई है। शिक्षक संघों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है, जिन्होंने उनकी पीड़ा को समझा और यह साहसिक निर्णय लिया।
इसके साथ ही, शिक्षकों ने अपने सर्वमान्य नेता प्रो. नवल किशोर यादव का भी विशेष रूप से आभार जताया है। शिक्षकों का कहना है कि प्रो. यादव के अथक प्रयासों और सच्चे नेतृत्व के बिना इस मंजिल को पाना असंभव था।

