- शैलेंद्र श्रीवास्तव
पटनाः बिहार के वित्तरहित अनुदानित स्कूल-कॉलेजों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों के लिए एक बड़ी और बहुप्रतीक्षित राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से आर्थिक तंगी और वेतन विसंगतियों की मार झेल रहे शिक्षाकर्मियों के लिए सरकार ने औपचारिक रूप से वेतन संरचना तय करने की दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी प्रारूप तैयार
सरकार के इस फैसले के तहत मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसने वित्तरहित अनुदानित संस्थानों के कर्मियों के वेतन ढांचे पर गंभीर मंथन शुरू कर दिया है। यह समिति केवल कागजी स्तर पर नहीं, बल्कि सीधे जमीनी स्तर पर शिक्षक-कर्मियों से सुझाव और फीडबैक लेगी। सभी पक्षों के सुझावों और वित्तीय पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करने के बाद समिति एक व्यापक वेतन संरचना का प्रारूप तैयार कर राज्य सरकार को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगी।
सड़क से सदन तक संघर्ष: प्रो. नवल किशोर यादव की मुहिम लाई रंग
वित्तरहित शिक्षा नीति के लागू होने के बाद से ही संस्थानों पर वित्तीय संकट गहरा गया था। इस नीतिगत और आर्थिक लड़ाई को पिछले कई दशकों से लगातार धार देने वाले विधान पार्षद प्रो. (डॉ.) नवल किशोर यादव की मेहनत अब ठोस परिणाम के रूप में सामने आ रही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2008 में प्रो. यादव के लगातार प्रयासों के कारण ही तत्कालीन सरकार द्वारा वित्तरहित अनुदान की व्यवस्था को अमलीजामा पहनाया गया था। अब वेतनमान की दिशा में हो रही इस नई पहल को उसी संघर्ष की ऐतिहासिक अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
शिक्षकों के सबसे भरोसेमंद जनप्रतिनिधि
शिक्षकों के हित में बिना किसी राजनीतिक नफा-नुकसान की परवाह किए प्रो. नवल किशोर यादव ने हमेशा अपनी बात बेबाकी से रखी है। चाहे सुबह 10 बजे से लेकर देर रात 10 बजे तक शिक्षकों की समस्याओं की सीधी सुनवाई हो या किसी भी क्षेत्र और वर्ग के शिक्षक के हक की बात, उन्होंने कभी भेदभाव नहीं किया। यही कारण है कि शिक्षक समाज का उन पर अटूट विश्वास रहा है और वे लगातार सदन में शिक्षकों की सबसे मुखर आवाज बने हुए हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा सकारात्मक असर
सरकार की इस पहल से न केवल वर्षों से आर्थिक संकट झेल रहे हजारों शिक्षक-कर्मियों को उनका वाजिब हक और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी, बल्कि राज्य के वित्तरहित माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और डिग्री कॉलेजों की पूरी शिक्षण व्यवस्था में भी नई ऊर्जा का संचार होगा। उच्चस्तरीय समिति के मंथन और सुझाव प्रक्रिया के शुरू होने से अब पूरे शिक्षक समाज में इस निर्णय के शीघ्र क्रियान्वयन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

