महिलाओं के सम्मान और उनके योगदान सर्वोपरि हैं

आलेख
  • ज्योति बाला / नोएडा

नारी तुम श्रद्धा हो, तुम ममता की सागर हो, तुम ही जग की रक्षक हो, तुम्हीं जगत की जननी हो। अंतर्ऱाष्ट्रीय महिला दिवस पर तुम्हें बारंबार प्रणाम है। तुमने देश-दुनिया को दशा एवं दिशा देने का काम किया है। तुम्हारे बारे में अब समाज भले ही जागरुक हो गया है लेकिन अभी और जागरुक होने की जरुरत है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस प्रतिवर्ष 8 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं के सम्मान और उनके समाज में योगदान को महसूस कराने के लिए तय किया गया है। यह दिन एक उत्सव की भावना के साथ दुनिया भर में मनाया जाता है। महिलाओं ने समाज को विकसित बनाने में अहम भूमिका निभाई है। पृथ्वी पर महिलाओं के बिना जीवन की परिकल्पना भी नहीं की जा सकती। नारी को सम्मान देने तथा उनके समर्पण के लिए उनका आभार जताने के लिए प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस धरती पर मौजूद प्रत्येक महिला के सम्मान से संबंधित है।

महिलाओं को उनकी क्षमता प्रदान की जाए तथा महिला सशक्तिकरण किया जाए। मानसिकता कहें या जड़ता, कहीं न कहीं पुरुष महिलाओ को अपने से नीचा समझता आया है इस मानसिकता में परिवर्तन करना बहुत जरुरी था और यह केवल महिलाओं को बेहतर अवसर प्रदान करके ही किया जा सकता था। जब महिलाओं को अवसर प्रदान किए गए तथा महिला सशक्तिकरण किया गया तो महिलाओं ने अपने आप को बेहतर रूप से साबित किया। यह महिलाओ की योग्यता और क्षमताओं का परिणाम है जो आज महिलाएं बेहतर स्थिति में हैं।

विश्व में हर जगह लैंगिग समानता के बारे में चर्चा होती है परन्तु आज भी विश्व भर में आर्थिक सुधारों के बाद भी 60 प्रतिशत महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर हैं। आज भी विश्व में पुरुषो और महिलाओं की आमदनी में पर्याप्त विषमता है। इसके अलावा महिलाओं की विश्व में राजनीती के क्षेत्र में भागीदारी केवल 24 प्रतिशत है। महिला सशक्तीकरण और महिला साक्षरता के लिए इतने अधिक प्रयास करने के बावजूद भी स्थिति अभी भी सामान्य नहीं है। महिलाओं के प्रति अपराध की घटनाओं में भी वृद्धि देखने को मिली है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए हमें अपनी सोच में परिवर्तन करना होगा और इसका दायित्व आज की युवा पीढ़ी पर ही है।

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