था बूढ़ा पर वीर बांकुड़ा कुंवर सिंह मर्दाना था
– मुरली मनोहर श्रीवास्तव“था बूढ़ा पर वीर बांकुड़ा कुंवर सिंह मर्दाना था, मस्ती की थी छिड़ी रागिनी, आजादी का गाना था, भारत के कोने-कोने में होता यही तराना था……”आज भी इस तरह के लोग परंपराओं में रची बसी बाबू कुंवर सिंह के वीरता की कहानी किसी न किसी रुप में याद जरुर करते हैं। 1857 […]
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