- शिक्षक हितों के प्रहरी: प्रो० नवल किशोर यादव की संघर्षगाथा
बिहार की धरती ने समय-समय पर ऐसे जननायकों को जन्म दिया है, जिन्होंने अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और व्यवस्था के लिए संघर्ष किया। शिक्षकों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई में यदि किसी नाम को पूरे सम्मान और भरोसे के साथ लिया जाता है, तो वह नाम है – प्रो० नवल किशोर यादव।
तीन दशक से अधिक समय से शिक्षक हितों की लड़ाई लड़ रहे प्रो० नवल किशोर यादव ने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने हमेशा यह साबित किया कि शिक्षक केवल विद्यालय की चारदीवारी तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज निर्माण की सबसे मजबूत नींव होता है। यही कारण है कि बिहार के हजारों शिक्षक उन्हें केवल नेता नहीं, बल्कि अपना अभिभावक मानते हैं।
जब-जब शिक्षकों के वेतन, सेवा शर्त, प्रोन्नति, स्थानांतरण, नियोजन, पेंशन और सम्मान की बात आई, तब-तब प्रो० नवल किशोर यादव सबसे आगे खड़े दिखाई दिए। उन्होंने सत्ता के गलियारों में शिक्षकों की आवाज को मजबूती से उठाया। चाहे धरना हो, आंदोलन हो, वार्ता हो या संघर्ष हर मोर्चे पर उनकी उपस्थिति शिक्षकों के लिए उम्मीद की किरण बनी रही।

उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने कभी अपने संघर्ष को व्यक्तिगत लाभ का माध्यम नहीं बनाया। कई अवसर आए, जब समझौते की राजनीति उनके सामने परोसी गई लेकिन प्रो० नवल किशोर यादव ने शिक्षकों के अधिकारों के साथ किसी कीमत पर समझौता नहीं किया। यही कारण है कि आज भी शिक्षक समाज उनके नाम पर भरोसा करता है।
सुबह 10 बजे से लेकर रात 10 बजे तक शिक्षकों की समस्याओं को सुनना, हर फोन का जवाब देना, किसी शिक्षक के वेतन रुके होने पर अधिकारियों से बात करना, किसी की सेवा पुस्तिका अटकी हो तो संबंधित विभाग तक पहुंचना यह उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है। वे केवल आश्वासन नहीं देते, बल्कि समाधान तक साथ खड़े रहते हैं। यही एक सच्चे जनप्रतिनिधि की पहचान होती है।
बिहार के दूरदराज़ गांवों से लेकर जिला मुख्यालय तक, हजारों शिक्षक आज भी यह कहते नहीं थकते कि “अगर हमारी लड़ाई में कोई सच्चाई से साथ खड़ा रहा, तो वह प्रो० नवल किशोर यादव हैं।” उनकी संवेदनशीलता, संघर्षशीलता और शिक्षकों के प्रति समर्पण ने उन्हें शिक्षक समाज के दिलों में एक अलग स्थान दिया है।
आज जब शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है, तब ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता और बढ़ जाती है, जो शिक्षकों की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझे। प्रो० नवल किशोर यादव ने अपने पूरे जीवन से यह संदेश दिया है कि शिक्षक सम्मानित होगा, तभी समाज शिक्षित और मजबूत बनेगा।
संघर्ष की इस लंबी यात्रा में उन्होंने न केवल शिक्षकों की आवाज बुलंद की, बल्कि यह भी साबित किया कि सच्चा नेता वही होता है, जो पद से नहीं, अपने कर्म और समर्पण से बड़ा बनता है। बिहार का शिक्षक समाज उनके इस योगदान को हमेशा सम्मान और गर्व के साथ याद रखेगा।

