पिता की सबक शिक्षा ही ऐसी विरासत है जिसमें कभी बंटवारा नहीं हो सकताः मुरली मनोहर श्रीवास्तव
(हैप्पी फादर्स-डे) अक्सर ग्रामीण परिवेश में शाम के समय दालान में बुजुर्गों की बैठकी लगती है। मेरे घर पर भी प्रतिदिन बैठकी लगती थी। इसमें हमारा काम चाय-पानी पिलाने का था और दादा जी के मित्रों के लिए बाजार से पान लाकर खिलाना था। अब मैं बड़ा हो चला था, समझ भी अब परिपक्वता की […]
Continue Reading
