मोतिहारीः बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में मोतिहारी प्रखंड के राज गोढ़वा पंचायत की करीब 300 महत्वपूर्ण सरकारी फाइलें पिछले 18 वर्षों से गायब हैं। इतना ही नहीं इस पंचायत में वर्ष 2020 से पहले पिछले 15 वर्षों से पदस्थापित रहे पंचायत सचिवों ने अपना पूर्ण प्रभार तक नहीं सौपा। इस दौरान तीन बार पंचायत का चुनाव भी सम्पन्न हुआ, तीन बार मुखिया बदले, छह पंचायत सचिव आये और गए लेकिन किसी पंचायत सचिव ने अपने स्थान पर आने वाले दूसरे किसी पंचायत सचिव को पूर्ण प्रभार सौंपना जरूरी नहीं समझा।
जिलाधिकारी से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री सचिवालय तक शिकायत (ऑनलाईन शिकायत संख्या-2023062586 दिनांक 14 नवंबर 2023) हुई, स्थानीय मुखिया ने जिला मुख्यालय पर आमरण अनशन किया, करीब 18 महीनों तक मैराथन जांच चली तब कही जाकर इस मामले में ऐसे सभी पंचायत सचिवों पर प्रथमिकी दर्ज करने का आदेश पूर्वी चंपारण पंचायत कार्यालय से जारी हुआ है।
पूर्वी चंपारण के जिला पंचायती राज पदाधिकारी रामजन्म पासवान ने संवाद एजेंसी ‘यूनीवार्ता’ से बातचीत में स्वीकार किया, “यह गंभीर किस्म का अपराध है इसलिए सीधे तौर पर चार पंचायत सचिवों पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया है। ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रभार के आदान-प्रदान के मामले में शीध्र ही दिशा-निर्देश जारी किया जायेगा।”
राज गोढवा में वर्ष 2005 से 2020 तक पदस्थापित और पूर्ण प्रभार नहीं देने वाले पंचायत सचिवों पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश जिला पंचायत राज पदाधिकारी ने दिया है। जिला पंचायती राज पदाधिकारी ने अलग-अलग तीन पत्र जारी कर गोढ़वा पंचायत के पांच पंचायत सचिवों महेश राम, फैयाज अहमद खां, श्यामा बैठा, राजेन्द्र चौधरी और आशुतोष कुमार से प्रभार के आदान-प्रदान संबंधी सूचीतलब करते हुए स्पष्टीकरण की मांग की थी। इस आलोक में पांच में से केवल तीन महेश राम, श्यामा बैठा और आशुतोष कुमार ने ही जवाब दिया।
इन तीन स्पष्टीकरणों और प्रभार के आदान-प्रदान की सूची की समीक्षा में जिला पंचायती राज पदाधिकारी ने पाया कि गोढ़वा पंचायत के तत्कालीन पंचायत सचिव राजेन्द्र चौधरी द्वारा श्यामा बैठा को 44 तथा पंचायत सचिव श्यामा बैठा द्वारा आशुतोष कुमार को 15 सरकारी संचिकाओं का प्रभार नहीं दिया गया है। ऐसे में जिला पंचायती राज पदाधिकारी ने प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी को अपने ज्ञापांक 2712 दिनांक 12 दिसंबर 2024 द्वारा पूर्ण प्रभार नहीं देने वाले पंचायत सचिवों के विरुद्ध स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है।
जिला पंचायती राज पदाधिकारी श्री पासवान के मौजूदा आदेश पत्र से स्पष्ट होता है कि केवल 59 संचिकाएं ही गायब हैं लेकिन ऐसा है नहीं। इस पंचायत की गायब संचिकाओं की सूचीबहुत बड़ी है। पंचायत के मुखिया राजू बैठा ने ‘यूनीवार्ता’ को महज चार पंचायत सेवकों के प्रभार आदान-प्रदान की सूचीउपलब्ध करायी है जिसमें गायब सरकारी संचिकाओं की तादात सौकडों में है। ऐसे में तत्कालीन पंचायत सचिव राम निवास बैठा से महेश राम ने 29 अगस्त 2012 को 283 संचिकाओं का प्रभार प्राप्त किया था लेकिन उन्होंने राजेन्द्र चौधरी को 15 फरवरी 2017 को महज 49 संचिकाओं का ही प्रभार सौंपा। इसका अर्थ यह है कि इन महज साढ़े चार वर्षों में ही 234 सरकारी संचिकाएं गायब हो गयीं।
गायब हुई 234 सरकारी संचिकाएं न तो मौजूदा कार्रवाई का हिस्सा बन पायीं और न ही अब तक ये किसी जांच का हिस्सा बनी हैं। वह भी वैसी स्थिति में जब एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि गोढ़वा पंचायत के मुखिया राजू बैठा ने जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखकर सरकारी संचिकाओं के गायब होने की सूचना दी और जांच कर कार्रवाई का आग्रह किया।
जिलाधिकारी ने प्रखंड विकास पदाधिकारी, मोतिहारी को जांच सौंपी। प्रखंड विकास पदाधिकारी ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी बनायी लेकिन वह कमेटी आज तक अपनी जांच पूरी नहीं कर सकी है। मुख्यमंत्री सचिवालय ने शिकायत के आलोक में जांच कर कार्रवाई करने के लिए पत्र भेजा लेकिन मुख्यमंत्री सचिवालय का पत्र भी मोतिहारी पहुंचकर निष्प्रभावी हो गया।
टूटती उम्मीदों ने मुखिया राजू बैठा को आमरण अनशन के लिए विवश किया। मोतिहारी मुख्यालय में 18 से 22 अगस्त 2024 तक चार दिनों का आमरण अनशन चला। चौथे दिन प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों ने जांच का भरोसा दिलाकर मुखिया का आमरण अनशन समाप्त कराया। उसके बाद कहीं जाकर कार्रवाई की परिस्थितियां बन पायी हैं। गड़बड़ियों की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पंचायत सचिवों से प्राप्त स्पष्टीकरण में इतनी संचिकाएं गायब मिली कि उनके स्पष्टीकरण को ही प्राथमिकी दर्ज करने योग्य मान लिया गया।
इस सम्पूर्ण प्रकरण की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शिक्षक नियोजन, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका नियोजन, आशा नियोजन, कन्या विवाह पंजी, वृद्धा पेंशन रजिस्टर, विधवा पेंशन रजिस्टर, रोजगार गारंटी पंजी, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान पंजी, मुख्यमंत्री निश्चय योजना संचिका, रोकड़ पुस्तिकाएं, पासबुक, चेकबुक के साथ सोलर लाइट, चापकल अधिष्ठापन और कई विकास योजनाओं से संबंधित महत्वपूर्ण संचिकाएं तथा पंजियां गायब हैं।
आर्श्चयजनक तो यह है कि संचिकाएं, पंजियां यहां तक कि बैंकों के पासबुक और चेकबुक तक गायब होते गये और पंचायत का कार्य निर्बाध चलता रहा, न जांच की जरूरत समझी गयी और न कार्रवाई की। सरकारी अभिलेखों को गायब करने वालों का प्रभाव भी इतना व्यापक रहा कि मुख्यमंत्री सचिवालय और जिलाधिकारी के जांच के आदेश तक निष्प्रभावी होते रहे और इस प्रकरण के प्रथमदृष्टया उत्तरदायी सरकारी सेवकों के लिए बेरोक-टोक अंतिम वेतन प्रमाणपत्र (एलपीसी) जारी होते रहे एवं एक-एक कर वे सेवानिवृत्ति का लाभ उठाते चले गए।

