पटनाः बिहार राज्य आवास बोर्ड में आवंटन के लिए किए जा रहे ऑनलाइन लॉटरी में घोर अनियमितता बरती जा रही है और बोर्ड के कर्मचारियों तथा पदाधिकारियों द्वारा लॉटरी हेतु तैयार किए गए सॉफ्टवेयर के साथ छेड़छाड़ कर जमीन का ऊंचे दामों में दलाली किये जाने का मामला प्रकाश में आया है।
इस पूरे खेल में लॉटरी का न तो प्रचार प्रसार किया गया और न ही बोर्ड की वेबसाइट पर इसका पूरा विवरण उपलब्ध कराया गया है। बल्कि कुछ प्रभावी लोगों को, जिसमें सरकार के उच्चाधिकारी शामिल हैं उन्हें स्वयं जमीन दिखाने ले जाते हैं। जनता के लिए वेबसाइट पर एक नक्शा तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।

जनता को लॉटरी का ट्रेनिंग तक नहीं दिया गया है। यह प्रक्रिया राज्य के निवासियों के लिए नई हैं। इसमें आम लोगों को ट्रेनिंग देनी चाहिए। लेकिन बोर्ड दलालों के साथ मिलकर इस प्रक्रिया को बिल्कुल गुप्त रखा जा रहा हैं जिससे आवेदक को कुछ पता ही नहीं चले।
अंदरूनी जानकारी के अनुसार नगर विकास एवं आवास विभाग तक से उसकी अनुमति नहीं ली गई हैं। बोर्ड के अध्यक्ष विकास आयुक्त, बिहार होते हैं। उनको तक इस की जानकारी नहीं हैं।
बोर्ड की वेबसाइट में लॉटरी का लिंक इतना छुपा कर दिया गया है कि, जिसको इस बात की जानकारी नहीं होगी वो आवेदक को कुछ पता ही नहीं चलेगा। मनमाने ढंग से प्रक्रिया को बनाया जा रहा हैं, जो आवेदक EWS श्रेणी की जिनकी वार्षिक आय एक लाख से कम है उनको भी अग्रधन के रूप में एक लाख मांगा जा रहा है।
इन सबसे ये पता चल रहा हैं कि बोर्ड चाहती ही नहीं कि बहुतायत संख्या में आवेदक आए जिससे दलाली करने में आसानी हो। जिस सॉफ्टवेयर कंपनी से लॉटरी का सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा है उसको पैसा खिला कर लॉटरी की प्रक्रिया में मनमाने ढंग से बदलाव कराए जा रहा है, जिससे अंदर अन्दर ही सारी संपत्ति बात जाए और किसी को पता भी नहीं चले। जबकि नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा इस सॉफ्टवेयर के क्रियाकलाप पर आपत्ति उठाई हैं, जांच करने का आदेश दिया हैं और कंपनी पर कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया हैं।
लॉटरी की एक मानक प्रक्रिया होती हैं लेकिन बोर्ड इस प्रक्रिया को गलत ढंग से सॉफ्टवेयर में डाल कर पैसा उगाही का काम करवाता हैं। बहादुरपुर और कंकड़बाग में दलाल सक्रिय हैं जो बोर्ड के पदाधिकारियों के लिए पैसा उठा रहे हैं और एक गुप्त लिस्ट बना रहे हैं जिनको जमीन दिलवाना है। इसके लिए पदाधिकारियों द्वारा करोड़ों रुपए का हेर फेर किया जा रहा हैं। बोर्ड के प्रबंध निदेशक के नाक के नीचे पूरा सिस्टम चल रहा है। इस प्रक्रिया पर बिना राज्य सरकार के अनुमोदन के काम करना जनता के हितों को पैर से कुचलने का काम किया जा रहा हैं।

