पटना: बिहार विधान परिषद की 8 शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के बहुप्रतीक्षित चुनावी परिणाम घोषित हो गए हैं। राज्य के बौद्धिक और प्रबुद्ध वर्ग के इस चुनाव में जहां एनडीए ने स्नातक सीटों पर अपना वर्चस्व काफी हद तक कायम रखा, वहीं शिक्षक सीटों पर पारंपरिक दलों के दिग्गज नेताओं के कई मजबूत किले ढह गए हैं। चुनावी राजनीति में उतरी प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज’ ने भी अपनी पहली औपचारिक जीत दर्ज कर ली है, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारकर मुख्यधारा के राजनीतिक दलों को बड़ा झटका दिया है।
घोषित नतीजों के अनुसार, एनडीए गठबंधन के खाते में कुल 4 सीटें गई हैं, जिनमें भाजपा को 3 और जदयू को 1 सीट मिली है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जन सुराज को 1-1 सीट पर कामयाबी मिली है, जबकि 2 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया है।
चुनावी नतीजों में सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में देखने को मिला, जहां राजद प्रत्याशी डॉ. संजीव कुमार ने तीन दशकों से काबिज भाजपा के वरिष्ठ नेता व दिग्गज एमएलसी नवल किशोर यादव को पराजित कर इतिहास रच दिया। पटना की शिक्षक सीट पर राजद की यह सेंधमारी एनडीए के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है। हालांकि, पटना स्नातक सीट पर जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने अपनी सीट बचाते हुए राजद और जन सुराज समर्थित प्रत्याशियों को कड़े मुकाबले में शिकस्त दी।
उधर मिथिलांचल के दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनावी राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। यहां जन सुराज के प्रत्याशी सुरेश राय ने कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा को हराकर प्रशांत किशोर की पार्टी का विधान परिषद में खाता खोल दिया। वहीं, दरभंगा स्नातक सीट पर भाजपा के सर्वेश कुमार ने राजद प्रत्याशी को पछाड़कर जीत दर्ज की।
सीमांचल और कोसी बेल्ट की बात करें तो कोशी स्नातक सीट पर भाजपा के डॉ. एन. के. यादव ने एक बार फिर अपनी मजबूत पकड़ साबित करते हुए जीत हासिल की।
दूसरी ओर तिरहुत और सारण प्रमंडल में मतदाताओं ने पारंपरिक दलीय समीकरणों को दरकिनार किया। तिरहुत शिक्षक सीट पर भाजपा के डॉ. नरेंद्र सिंह विजयी रहे, लेकिन तिरहुत स्नातक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी वंशीधर ब्रजवासी ने जदयू के अभिषेक झा को हराकर सबको चौंका दिया। इसी तरह सारण शिक्षक सीट पर भी एनडीए और जन सुराज दोनों के आधिकारिक प्रत्याशियों को पछाड़ते हुए निर्दलीय राहुल राज ने शानदार जीत हासिल की।
इन परिणामों का सीधा संदेश यह है कि बिहार का मतदाता अब केवल पारंपरिक दलीय बंधनों में बंधा नहीं है। स्नातक मतदाता अभी भी एनडीए के विकास और स्थायित्व के एजेंडे के साथ खड़े दिखे, लेकिन शिक्षक वर्ग ने वेतन विसंगतियों, सेवा शर्तों और स्थानीय मुद्दों को तरजीह देते हुए सत्तापक्ष के खिलाफ मुखर नाराजगी जाहिर की। जन सुराज की एंट्री और दो निर्दलीयों की जीत यह स्पष्ट इशारा करती है कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुकाबला अब केवल एनडीए बनाम महागठबंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तीसरा कोण और मजबूत स्थानीय चेहरे चुनावी समीकरण बिगाड़ने की पूरी ताकत रखते हैं।

