“हमारी नदियां, हमारी वाटर बॉडीज पूरे वाटर इकोसिस्टम का सबसे अहम हिस्सा होते हैं”-पीएम

* “नमामि गंगे मिशन को एक खाका बनाकर अन्य राज्य भी नदियों के संरक्षण के लिए ऐसे ही अभियान चला सकते हैं” दिल्लीःप्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने  वीडियो संदेश के माध्यम से जल संरक्षण के विषय पर राज्यों के मंत्रियों के प्रथम अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन का विषय ‘वाटर विजन @ 2047’ है और फोरम का उद्देश्य सतत विकास और मानव विकास के लिए जल संसाधनों के दोहन के तरीकों पर चर्चा के लिए प्रमुख नीति निर्माताओं को एक साथ लाना है। अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री ने जल सुरक्षा के क्षेत्रों में भारत द्वारा किए गए अभूतपूर्व कार्यों पर प्रकाश डालते हुए देश के जल मंत्रियों के पहले अखिल भारतीय सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी संवैधानिक व्यवस्था में पानी का विषय, राज्यों के नियंत्रण में आता है और जल संरक्षण के लिए राज्यों के प्रयास, देश के सामूहिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में बहुत सहायक होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि जल संरक्षण से जुड़े अभियानों में जनता को, सामाजिक संगठनों को, सिविल सोसाइटी को भी ज्यादा से ज्यादा साथ लेना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा, “वाटर विजन @ 2047 अमृत काल की अगले 25 वर्षों की यात्रा का एक महत्वपूर्ण आयाम है।” प्रधानमंत्री ने ‘समग्र सरकार’ और ‘संपूर्ण देश’ के अपने दृष्टिकोण को दोहराते हुए, इस बात पर जोर दिया कि सभी सरकारों को एक ऐसी प्रणाली की तरह काम करना चाहिए, जिसमें राज्य सरकारों के विभिन्न मंत्रालयों, जैसे जल मंत्रालय, सिंचाई मंत्रालय, कृषि मंत्रालय, ग्रामीण और शहरी विकास मंत्रालय और आपदा प्रबंधन मंत्रालय के बीच निरंतर संपर्क और संवाद हो। उन्होंने कहा कि अगर इन विभागों के पास एक-दूसरे से संबंधित जानकारी और डेटा होगा तो योजना बनाने में मदद मिलेगी। यह बताते हुए कि केवल सरकार के प्रयासों से सफलता नहीं मिलती है, प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक और सामाजिक संगठनों और नागरिक समाजों की भूमिका की ओर ध्यान आकर्षित किया और जल संरक्षण से संबंधित अभियानों में उनकी अधिकतम भागीदारी के लिए कहा। प्रधानमंत्री ने समझाते हुए कहा कि जनभागीदारी को बढ़ावा देने से सरकार की जवाबदेही कम नहीं होती है और इसका मतलब यह नहीं है कि सारी जिम्मेदारी लोगों पर डाल दी जाए। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अभियान में किए जा रहे प्रयासों और खर्च किए जा रहे धन के बारे में जनता के बीच जागरूकता पैदा की जाती है। उन्होंने कहा, “जब किसी अभियान से जनता जुड़ी रहती है, तो उसे कार्य की गंभीरता भी पता चलती है। इससे जनता में किसी योजना या अभियान के प्रति सेंस ऑफ ओनरशिप भी आती है।” प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान का उदाहरण देते हुए कहा, “जब लोग स्वच्छ भारत अभियान से जुड़े तो जनता में भी एक चेतना जागृत हुई।” भारत के लोगों को उनके प्रयासों का श्रेय देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने कई पहल की, चाहे वह गंदगी हटाने के लिए संसाधन एकत्र करना हो, विभिन्न जल उपचार संयंत्रों का निर्माण करना हो या शौचालयों का निर्माण करना हो, लेकिन इस अभियान की सफलता तब सुनिश्चित हुई जब जनता ने गंदगी को बिल्कुल हटाने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण के प्रति जन भागीदारी के इस विचार को मन में बैठाने और प्रभावी तौर पर जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया, “हम ‘जल जागरूकता महोत्सव’ आयोजित कर सकते हैं या स्थानीय स्तर पर आयोजित मेलों में जल जागरूकता से संबंधित एक कार्यक्रम जोड़ा जा सकता है।” उन्होंने विद्यालयों में पाठ्यचर्या से लेकर गतिविधियों तक नवीन तरीकों से युवा पीढ़ी को इस विषय से अवगत कराने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने बताया कि देश हर जिले में 75 अमृत सरोवर बना रहा है, जिसमें अब तक 25 हजार अमृत सरोवर बन चुके हैं। उन्होंने समस्याओं की पहचान करने और समाधान खोजने के लिए प्रौद्योगिकी, उद्योग और स्टार्टअप्स को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया और जियो-सेंसिंग और जियो-मैपिंग जैसी तकनीकों के बारे में बताया, जो बहुत मददगार हो सकते हैं। उन्होंने नीतिगत स्तरों पर पानी से संबंधित मुद्दों से निपटने के लिए सरकारी नीतियों और नौकरशाही प्रक्रियाओं को लागू करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। प्रत्येक घर को पानी उपलब्ध कराने के लिए एक राज्य के लिए एक प्रमुख विकास पैरामीटर के रूप में ‘जल जीवन मिशन’ की सफलता पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि कई राज्यों ने अच्छा काम किया है, जबकि कई राज्य इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि एक बार यह व्यवस्था लागू हो जाने के बाद हमें भविष्य में भी इसी तरह इसका रखरखाव सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि ग्राम पंचायतें जल जीवन मिशन का नेतृत्व करें और काम पूरा होने के बाद वे यह भी प्रमाणित करें कि पर्याप्त और स्वच्छ पानी उपलब्ध हो गया है। उन्होंने कहा, “प्रत्येक ग्राम पंचायत भी एक मासिक या त्रैमासिक रिपोर्ट ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकती है, जिसमें गांव में नल से पानी प्राप्त करने वाले घरों की संख्या बताई गई हो।” उन्होंने यह भी कहा कि पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर जल परीक्षण की व्यवस्था भी विकसित की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने उद्योग और कृषि दोनों क्षेत्रों में पानी की आवश्यकताओं के बारे में चर्चा करते हुए सुझाव दिया कि हमें इन दोनों ही सेक्टर्स से जुड़े लोगों में विशेष अभियान चलाकर इन्हें वाटर सिक्योरिटी के प्रति जागरूक करना चाहिए। उन्होंने फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती जैसी तकनीकों का उदाहरण दिया, जो जल संरक्षण पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत शुरू हुए ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ अभियान पर भी प्रकाश डाला और बताया कि देश में अब तक 70 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सूक्ष्म सिंचाई के तहत लाया जा चुका है। उन्होंने कहा, “सभी राज्यों द्वारा सूक्ष्म सिंचाई को लगातार बढ़ावा दिया जाना चाहिए”। उन्होंने अटल भूजल संरक्षण योजना का भी उदाहरण दिया, जिसमें भू-जल पुनर्भरण के लिए सभी जिलों में बड़े पैमाने पर वाटरशेड का काम जरूरी है और पहाड़ी क्षेत्रों में स्प्रिंगशेड को पुनर्जीवित करने के लिए विकास कार्यों में तेजी लाने की जरूरत पर भी बल दिया। जल संरक्षण के लिए राज्य में वन क्षेत्र को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने पर्यावरण मंत्रालय और जल मंत्रालय द्वारा समन्वित प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने जल के सभी स्थानीय स्रोतों के संरक्षण पर भी ध्यान देने का आह्वान किया और दोहराते हुए कहा कि ग्राम पंचायतें अगले 5 वर्षों के लिए एक कार्ययोजना तैयार करें, जहां जल आपूर्ति से लेकर स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन तक के रोडमैप पर विचार किया जाए। प्रधानमंत्री ने राज्यों से यह भी कहा कि किस गांव में कितने पानी की जरूरत है और इसके लिए क्या काम किया जा सकता है, इसके आधार पर पंचायत स्तर पर जल बजट तैयार करने के तरीके अपनाएं। ‘कैच द रेन’ अभियान की सफलता पर प्रकाश डालते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे अभियान राज्य सरकार का एक अनिवार्य हिस्सा बनने चाहिए, जहां उनका वार्षिक मूल्यांकन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “बारिश का इंतजार करने के बजाय, बारिश से पहले सारी योजना बनाने की जरूरत है।” जल संरक्षण के क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने इस बजट में सर्कुलर इकोनॉमी पर काफी जोर दिया है। उन्होंने कहा, “जब ट्रीटेड वॉटर को री-यूज किया जाता है, फ्रेश वाटर को कंजर्व किया जाता है, तो उससे पूरे इकोसिस्टम को बहुत लाभ होता है। इसलिए वाटर ट्रीटमेंट, वॉटर रीसाइकलिंग आवश्यक है।” उन्होंने दोहराया कि राज्यों को विभिन्न उद्देश्यों के लिए ‘ट्रीटेड वॉटर’ के उपयोग को बढ़ाने के तरीके खोजने होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी कोई भी नदी या वाटर बॉडी बाहरी कारकों से प्रदूषित ना हो, इसके लिए हमें हर राज्य में वाटर मैनेजमेंट और सीवेज ट्रीटमेंट का नेटवर्क बनाना होगा। उन्होंने हर राज्य में अपशिष्ट प्रबंधन और सीवेज ट्रीटमेंट का एक नेटवर्क बनाने पर जोर देते हुए कहा, “हमारी नदियां, हमारी वाटर बॉडीज पूरे वाटर इकोसिस्टम का सबसे अहम हिस्सा होते हैं।” अंत में, प्रधानमंत्री ने कहा, “नमामि गंगे मिशन को एक खाका बनाकर अन्य राज्य भी नदियों के संरक्षण के लिए इसी तरह के अभियान शुरू कर सकते हैं। जल को सहयोग और समन्वय का विषय बनाना प्रत्येक राज्य की जिम्मेदारी है।” जल संरक्षण के विषय पर राज्यों के मंत्रियों के प्रथम अखिल भारतीय वार्षिक सम्मेलन में सभी राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों ने भाग लिया।

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हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड अयस्क उत्पादन में तीन गुना वृद्धि के लिए प्रयासरत

दिल्लीः हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड और धनबाद के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स) के बीच सहयोगी तथा प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाओं के लिए कोलकाता स्थित एचसीएल कॉर्पोरेट कार्यालय में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस अवसर पर एचसीएल के मुख्य प्रबंध निदेशक श्री अरुण कुमार शुक्ला और आईआईटी (आईएसएम), धनबाद के निदेशक प्रोफेसर राजीव शेखर उपस्थित थे। धनबाद के आईआईटी (आईएसएम) के साथ किया गया यह समझौता अपनी तरह का पहला तकनीकी सहयोग है, जो एचसीएल के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड भारत का एकमात्र ऐसा तांबा खनिक है, जिसके पास देश में तांबा अयस्क के सभी परिचालन खनन पट्टे हैं। वर्तमान में, अधिकांश अयस्क उत्पादन भूमिगत मोड के माध्यम से ही होता है और राष्ट्रीय अयस्क उत्पादन का स्तर लगभग चालीस लाख टन प्रति वर्ष है। अयस्क निकाय की जटिल भूवैज्ञानिक विशेषताओं और खनन की बढ़ती गहराई की चुनौती के कारण विशेषकर उत्पादन की प्रक्रिया के दौरान तकनीकी/परिचालन संबंधी समस्याओं के साथ-साथ विभिन्न भू-तकनीकी एवं भूजल संबंधी मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, सुरक्षा मानकों को बनाए रखने और खनन में स्थिरता के उभरते हुए मुद्दों से निपटना भी समय की आवश्यकता है। एचसीएल अयस्क उत्पादन क्षमता में लगभग तीन गुना वृद्धि के साथ अपने विस्तार के चरण में है, जिसके तहत परियोजनाओं में विकास की गतिविधियां या तो जारी हैं या फिर इसकी अधिकांश खानों में पहले से ही योजनाएं लागू की गई हैं। वर्तमान में, खनन किए गए अयस्क को एचसीएल के अपने स्वयं के अयस्क संशोधन संयंत्रों में संसाधित किया जाता है और फिर सांद्र धातु (एमआईसी) को आंशिक रूप से घरेलू बाजार में तथा शेष अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचा जाता है। धनबाद का आईआईटी (आईएसएम) विशेष रूप से खनिजों के खनन और इसकी लाभकारी गतिविधियों तथा पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय ख्याति का संस्थान होने के नाते, यह देश में उभरते हुए भूवैज्ञानिक, तकनीकी, पर्यावरण, टिकाऊ और एचसीएल के परिकल्पित विस्तार कार्यक्रम के साथ ही अन्य अयस्क लाभकारी मुद्दों को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वर्तमान समझौता ज्ञापन अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग के साथ खनन विधियों को संशोधित करके तांबा अयस्क उत्पादन बढ़ाने के लिए आईआईटी-आईएसएम से तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा और मार्गदर्शन तथा परामर्श से सम्बन्धित एचसीएल की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। इसके अलावा, तांबा अयस्क की गहन खोज के लिए खानों में उत्पादकता और सुरक्षा में सुधार, पर्यावरणीय मंजूरी के मुद्दे, विभिन्न हाइड्रोलॉजिकल तथा हाइड्रो-जियोलॉजिकल अध्ययन एवं अपरंपरागत अन्वेषण विधियों जैसे भूभौतिकीय अन्वेषण, रिमोट सेंसिंग आदि के क्षेत्रों में ध्यान केंद्रित किया जायेगा। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड कंपनी भारतीय तांबा खनन क्षेत्र में सुधार, एचसीएल इंजीनियरों और प्रबंधकों के कौशल विकास एवं अन्वेषण के क्षेत्रों में ज्ञान उन्नयन के लिए प्रशिक्षण व विकास के लिए अनुसंधान तथा विकास परियोजनाओं को शुरू करने में आईआईटी-आईएसएम को भागीदार बनाना चाहती है। इस समझौते से अयस्क संशोधन व सज्जीकरण और विभिन्न अन्य वैधानिक/खदान विनियमन संशोधन तथा अन्य संबंधित मुद्दों को हल करने में मदद मिलेगी।

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देश की 80 प्रतिशत से अधिक आबादी तक पहुंचने के लिए आकाशवाणी के एफएम कवरेज को बढ़ाया जाएगा

दिल्लीः आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने प्रसार भारती यानी ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) और दूरदर्शन (डीडी) के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2,539.61 करोड़ रुपये की लागत वाली केंद्रीय क्षेत्र की योजना “द ब्रॉडकास्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड नेटवर्क डेवलपमेंट” (बीआईएनडी) के संबंध में सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। […]

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गोवा का नामकरण ‘मनोहर इंटरनेशनल एयरपोर्ट- मोपा, गोवा’ को कार्योत्तर मंजूरी

दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पूर्व रक्षा मंत्री एवं चार बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे दिवंगत श्री मनोहर पर्रिकर को श्रद्धांजलि के रूप में ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट मोपा, गोवा का नामकरण ‘मनोहर इंटरनेशनल एयरपोर्ट- मोपा, गोवा’ के रूप में करने को कार्योत्तर मंजूरी दे दी है। गोवा राज्य के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा […]

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हिमाचल में 382 मेगावाट सुन्नी बांध जल विद्युत परियोजना के लिए निवेश को मंजूरी

दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 2614.51 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एसजेवीएन लिमिटेड द्वारा हिमाचल प्रदेश में 382 मेगावाट सुन्नी बांध जल विद्युत परियोजना को स्वीकृति दे दी है। इसमें बुनियादी ढांचे को सक्षम बनाने के लिए भारत सरकार की बजटीय सहायता के रूप में 13.80 करोड़ रुपये के निवेश को भी […]

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एयर इंडिया में महिला के साथ शराबी द्वारा की गई बदसलूकी के लिए केंद्र सरकार है जिम्मेदार : प्रो. रणबीर नंदन

पटना: न्यूयॉर्क से 26 नवंबर 2022 को दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-102 में एक व्यक्ति ने महिला पर पेशाब कर दिया। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व विधान पार्षद प्रो. रणबीर नंदन ने केंद्र सरकार और इंडियन एयरलाइन्स प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। […]

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फिट इंडिया मूवमेंट नए साल में ‘फिट इंडिया-संडे टॉक्स’ नामक एक विशेष ऑनलाइन श्रृंखला शुरू

दिल्लीः युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय का एक प्रमुख कार्यक्रम – फिट इंडिया मूवमेंट नए साल में ‘फिट इंडिया-संडे टॉक्स’ नामक एक विशेष ऑनलाइन श्रृंखला शुरू करने के लिए तैयार है। यह कार्यक्रम जाने माने फिटनेस विशेषज्ञों और फिट इंडिया आइकन द्वारा एक ऑनलाइन टॉक शो है, जो, 8 जनवरी से 26 फरवरी, 2023 तक […]

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झूठ की खेती और लोकतंत्र की हत्या है भाजपा का एजेंडा : डॉ. रणबीर नंदन

पटनाः जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व विधान पार्षद डॉ. रणबीर नंदन ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के बिहार दौरे पर नीतीश कुमार पर दिए बयानों पर कड़ा जवाब दिया है। डॉ. नंदन ने कहा कि नीतीश कुमार इस देश के सबसे ईमानदार नेता हैं। उनकी छवि विकास पुरुष की है। […]

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जल संरक्षित रहेगा और हरियाली रहेगा तभी जीवन सुरक्षित रहेगाः मुख्यमंत्री

पटनाः मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सम्राट अशोक कन्वेंशन केन्द्र स्थित ज्ञान भवन में जल- जीवन – हरियाली दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का पौधे में जल अर्पण कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जल – जीवन – हरियाली दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सभी लोगों ने […]

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भारत को 21वीं सदी में वो मुकाम हासिल होगा, जिसका वो हमेशा हकदार रहा हैःपीएम

दिल्लीः   ‘इंडियन साइन्स काँग्रेस’ के आयोजन के लिए बहुत-बहुत बधाई अगले 25 वर्षों में भारत जिस ऊंचाई पर होगा, उसमें भारत की वैज्ञानिक शक्ति की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी। साइंस में Passion के साथ जब देश की सेवा का संकल्प जुड़ जाता है, तो नतीजे भी अभूतपूर्व आते हैं। मुझे विश्वास है, भारत की साइंटिफिक कम्यूनिटी, भारत को 21वीं सदी में वो मुकाम हासिल कराएगी, जिसका वो हमेशा हकदार रहा है। मैं इस विश्वास की वजह भी आपको बताना चाहता हूं। आप भी जानते हैं कि Observation साइंस का मूल आधार है। Observation के जरिए आप साइंटिस्ट्स, patterns फॉलो करते हैं, फिर उन patterns को analyse करने के बाद किसी नतीजे पर पहुंचते हैं। इस दौरान एक साइंटिस्ट के लिए हर कदम पर डेटा जुटाना और उसे analyse करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। 21वीं सदी के आज के भारत में हमारे पास दो चीजें बहुतायत में हैं। पहली- डेटा और दूसरी- टेक्नोलॉजी। इन दोनों में भारत की साइंस को नई बुलंदियों पर पहुंचाने की ताकत है। Data Analysis की फील्ड, तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। ये Information को Insight में और Analysis को actionable Knowledge में बदलने में मदद करती है। चाहे Traditional Knowledge हो या Modern Technology, ये दोनों ही Scientific Discovery में मददगार होती हैं। और इसलिए, हमें अपने scientific process को और मजबूत बनाने के लिए अलग-अलग techniques के प्रति खोजी प्रवृत्ति को विकसित करना होगा। आज का भारत जिस साईंटिफ़िक अप्रोच से आगे बढ़ रहा है, हम उसके नतीजे भी देख रहे हैं। साइंस के क्षेत्र में भारत तेजी से वर्ल्ड के Top Countries में शामिल हो रहा है। 2015 तक हम 130 देशों की ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 81वें नंबर पर थे। लेकिन, 2022 में हम छलांग लगाकर 40वें नंबर पर पहुँच गए हैं। आज भारत, PhDs के मामले में दुनिया में टॉप-3 देशों में है। आज भारत स्टार्ट अप ecosystem के मामले में दुनिया के टॉप-3 देशों में है। मुझे खुशी है कि, इस बार इंडियन साइन्स काँग्रेस की थीम भी एक ऐसा विषय है, जिसकी दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। विश्व का भविष्य sustainable development के साथ ही सुरक्षित है। आपने sustainable development के विषय को women empowerment के साथ जोड़ा है। मैं मानता हूँ कि, व्यावहारिक रूप से भी ये दोनों एक दूसरे से जुड़े हुये हैं। आज देश की सोच केवल ये नहीं है कि हम साइन्स के जरिए women empowerment करें। बल्कि, हम women की भागीदारी से साइन्स का भी empowerment करें, साइन्स और रिसर्च को नई गति दें, ये हमारा लक्ष्य है। अभी भारत को G-20 समूह की अध्यक्षता की ज़िम्मेदारी मिली है। G-20 के प्रमुख विषयों में भी women led development एक बड़ी प्राथमिकता का विषय है। बीते 8 वर्षों में भारत ने गवर्नेंस से लेकर सोसाइटी और इकॉनमी तक, इस दिशा में कई ऐसे असाधारण काम किए हैं, जिनकी आज चर्चा हो रही है। आज भारत में मुद्रा योजना के जरिए छोटे उद्योगों और व्यवसायों में भागीदारी हो या स्टार्टअप वर्ल्ड में लीडरशिप, महिलाएं हर जगह पर अपना दम दिखा रही हैं। बीते 8 वर्षों में Extramural research and development में महिलाओं की भागीदारी दोगुनी हुई है। महिलाओं की ये बढ़ती भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि समाज भी आगे बढ़ रहा है और देश में साइन्स भी आगे बढ़ रही है। किसी भी वैज्ञानिक के लिए असल चुनौती यही होती है कि वो अपने knowledge को ऐसे applications में बदल दे, जिससे दुनिया की मदद हो सके। जब साइंटिस्ट अपने प्रयोगों से गुजरता है तो उसके मन में यही सवाल रहते हैं कि क्या इससे लोगों का जीवन बेहतर होगा? या उनकी खोज से विश्व की जरूरतें पूरी होंगी? साइंस के प्रयास, बड़ी उपलब्धियों में तभी बदल सकते हैं- जब वो lab से निकलकर land तक पहुंचे, जब उसका प्रभाव global से लेकर grassroot तक हो, जब उसका विस्तार journals से लेकर जमीन तक हो, जब उससे बदलाव research से होते हुए real life में दिखने लगे। जब साइंस की बड़ी उपलब्धियां experiments से लेकर लोगों के experiences तक का सफर तय करती हैं, तो इससे एक अहम संदेश जाता है। ये बात युवाओं को बहुत प्रभावित करती है। वो सोचते हैं कि साइंस के जरिए वो पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए Institutional Framework की आवश्यकता होती है। ताकि उनकी आकांक्षाओं का विस्तार किया जा सके, उन्हें नए अवसर दिए जा सकें। मैं चाहूंगा कि यहां मौजूद वैज्ञानिक ऐसा Institutional Framework विकसित करें, जो युवा प्रतिभाओं को आकर्षित करे और उन्हें आगे बढ़ने का मौका दे। उदाहरण के लिए, टैलेंट हंट और हैकेथॉन के आयोजनों के जरिए साइंटिफिक सोच रखने वाले बच्चों की तलाश की जा सकती है। इसके बाद उन बच्चों की समझ को एक proper roadmap के जरिए विकसित किया जा सकता है। इसमें सीनियर साइंटिस्ट उनकी मदद कर सकते हैं। आज हम देखते हैं कि स्पोर्ट्स में भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसके पीछे दो महत्वपूर्ण वजह है। पहला, स्पोर्ट्स की प्रतिभाओं को विकसित करने के लिए देश में Institutional Framework को मजबूत बनाया गया। दूसरा, स्पोर्ट्स में गुरु-शिष्य परंपरा का अस्तित्व और प्रभाव। जहां नई प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाया जाता है। जहां शिष्य की सफलता में गुरु अपनी कामयाबी देखते हैं। ये परंपरा साइंस के क्षेत्र में भी सफलता का मंत्र बन सकता है। […]

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