पटना : बिहार के शिक्षा जगत और वित्त रहित शिक्षाकर्मियों के लिए ऐतिहासिक पहल करने वाले प्रो. नवल किशोर यादव की अवुवाई में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का सम्मान समारोह। राज्य में पिछले 40 साल से चली आ रही वित्त रहित शिक्षा की व्यवस्था, जिसे ‘शैक्षणिक कलंक’ कहा जा रहा था, उसका अब अंत हो गया है। सरकार ने इन शिक्षाकर्मियों को वेतनमान देने का बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिससे हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों में भारी उत्साह और खुशी की लहर है।
पटना की सड़कों पर लगे धन्यवाद के बैनर-होर्डिंग
इस बड़े फैसले के बाद राजधानी पटना की सड़कों पर जश्न का माहौल है और बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए हैं। बैनरों पर बड़े अक्षरों में लिखा गया है- “बिहार में 4 दशकों से चली आ रही शैक्षणिक कलंक का अंत! वित्त रहित शिक्षाकर्मियों को वेतनमान देने का ऐतिहासिक निर्णय”।
”वित्त रहित परिवार” (शिक्षकों का समूह) ने इस ऐतिहासिक फैसले के लिए बिहार के लोकप्रिय मुख्यमंत्री और सम्राट चौधरी जी का विशेष रूप से हार्दिक अभिनंदन और आभार व्यक्त किया है। होर्डिंग में विधान पार्षद प्रो. (डॉ.) नवल किशोर यादव की तस्वीर भी प्रमुखता से लगाई गई है। साथ ही, बैनर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की तस्वीरें भी शामिल हैं।
श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में भव्य अभिनंदन समारोह
नेताओं का आभार प्रकट करने और इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाने के लिए एक विशेष अभिनंदन समारोह का भी आयोजन किया गया। बैनर पर दी गई जानकारी के अनुसार, यह धन्यवाद कार्यक्रम 20 सितंबर 2026 को पटना के प्रसिद्ध श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया है।
शिक्षकों के लिए बड़ी जीत
यह निर्णय उन हज़ारों शिक्षकों और कर्मियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत और जीत है, जो लंबे समय से बिना किसी निश्चित वेतनमान के शिक्षण कार्य में अपना जीवन दे रहे थे। सरकार के इस कदम से न सिर्फ शिक्षकों के जीवन स्तर में सुधार आएगा, बल्कि इसे बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

