शिक्षकों की आवाज प्रो. नवल किशोर यादव ने किया नामांकन: 5 बार की जीत के बाद छठी बार मैदान में, समर्थकों ने कहा- ‘हर शिक्षक लड़ रहा है यह चुनाव’

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शिक्षकों की आवाज प्रो. नवल किशोर यादव ने किया नामांकन: 5 बार की जीत के बाद छठी बार मैदान में, समर्थकों ने कहा- ‘हर शिक्षक लड़ रहा है यह चुनाव’


• प्रो.नवल किशोर यादव की पहल लायी रंग, वित्त रहित शिक्षकों को वित्त सहित करने का मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की घोषणा


• यह चुनाव अकेले प्रो. नवल किशोर यादव का नहीं, बल्कि सूबे का हर एक शिक्षक खुद प्रो. नवल किशोर यादव बनकर मैदान में उतरता है


पटना: बिहार विधान परिषद में सबसे लंबे समय तक शिक्षक समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ राजनेता प्रो. (डॉ.) नवल किशोर यादव ने आज पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन पर्चा दाखिल किया। लगातार 5 बार जीत दर्ज कर इतिहास रचने वाले प्रो. यादव इस बार सदन पहुंचने के लिए छठी बार चुनावी समर में ताल ठोक चुके हैं। नामांकन के दौरान जुटे शिक्षक समाज और समर्थकों ने गर्मजोशी और ध्वनिमत से उनका अभिवादन करते हुए इस बार भी प्रचंड जीत का संकल्प दोहराया।
प्रो. नवल किशोर यादव के चुनाव की सबसे खास बात यह रही है कि यहां उम्मीदवार से ज्यादा खुद शिक्षक मतदाता चुनाव प्रचार से लेकर मतदान केंद्र तक की बागडोर संभालते हैं। नामांकन के मौके पर समर्थकों और शिक्षक प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा, “यह चुनाव अकेले प्रो. नवल किशोर यादव का नहीं, बल्कि सूबे का हर एक शिक्षक खुद प्रो. नवल किशोर यादव बनकर मैदान में उतरता है।” शिक्षकों का यह स्वतःस्फूर्त जुड़ाव ही उनकी राजनीतिक ताकत की सबसे बड़ी रीढ़ बना हुआ है।
प्रो. यादव केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि शिक्षकों के अधिकारों के सजग प्रहरी के रूप में जाने जाते हैं। चाहे शिक्षकों के वेतनमान का मुद्दा हो, सेवाशर्त नियमावली, पेंशन की मांग या फिर शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने की बात हो, उन्होंने हमेशा सड़क पर आंदोलन से लेकर विधान परिषद के पटल तक सबसे मुखर आवाज उठाई है। नीतिगत फैसलों में शिक्षकों के हितों की रक्षा कराने में उनकी निर्णायक भूमिका रही है।
आज नामांकन दाखिल करने के बाद प्रो. नवल किशोर यादव एक बार फिर शिक्षक समाज की उम्मीदों की मजबूत किरण बनकर उभरे हैं। नामांकन स्थल पर उमड़े हुजूम और शिक्षकों के उत्साह ने चुनावी फिजा को पूरी तरह उनके पक्ष में मोड़ दिया है। समर्थकों का विश्वास है कि शिक्षक समाज अपने इस आजमाए हुए और विश्वसनीय नेतृत्व को छठी बार भी ऐतिहासिक मतों से विजयी बनाकर सदन भेजेगा।

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