बाबू कुंवर सिंह की स्मृति में तोरण द्वार का निर्माण होना हमारे लिए गौरव की बात हैः जितेंद्र स्वामी

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आराः 1857 के वीर सेनानी बाबू कुंवर सिंह की कृति से पूरा देश वाकिफ है। उन्होंने देश की सेवा के लिए खुद को न्योक्षावर कर दिया था। आज उस पुरोधा के नाम पर उनके पैतृक गांव जगदीशपुर में तोरण द्वार बनाने को लेकर कुंवर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेंद्र स्वामी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा पिछले साल हमलोगों ने बाबू कुंवर सिंह जी के किला के मैदान में हमलोगों ने बैठक की थी और उसमें सारी जानकारी दी थी की बाबू कुंवर सिंह जी के तोरण द्वार को तोड़ दिया गया था। इस संदर्भ में जगदीशपुर की अनुमंडल पदाधिकारी सीमा कुमारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इंजीनियर के द्वारा गेट के जर्जर होने पर तोड़ दिए जाने का हवाला दिया गया था। उसके बाद 1 दिसंबर को हमने इसके खिलाफ आवाज उठायी। गेट के तोड़े जाने के बाद हम पटना उच्चा न्यायालय भी गए जहां से एनएचआई को नोटिस दिया गया साथ ही संबंधित अधिकारी और भोजपुर के जिलाधिकारी को भी इसकी सूचना दी गई।
9 जनवरी को बैठक हुई उसमें सूचना मिली की गेट का निर्माण होगा, इसको लेकर स्थल का चयन किया जाए। कुंवर वाहिनी के द्वारा 30 से 35 फीट ऊंचा गेट बनाने की मांग की गई और उसमें पत्थर से निर्माण किए जाने की मांग की गई। कुंवर वाहिनी के बिहार प्रदेश संयोजक धीरज कुमार सिंह उर्फ लव सिंह ने बताया की अनुमंडलाधिकारी ने बताया है कि इस गेट के निर्माण के लिए कंपनी के द्वारा 17 लाख रुपये दिए जाने की बात स्वीकार की गई है। यह गेट स्मृति द्वारा है, भोजपुर की स्मिता से जुड़ी हुआ गेट है। इसके बाद श्री स्वामी ने कहा कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह जी आए थे अमृत महोत्सव के तहत कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस आयोजन में बाबू साहब की स्मृति को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की घोषणा की गई मगर उस पर आजतक काम नहीं हुआ है। पर्यटन विभाग के सचिव से मिला तो उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई सूचना नहीं है अब तक। गिनिज बुक में नाम दर्ज तो हुआ मगर जगदीशपुर की जिक्र कर दिया गया लेकिन अफसोस की बाबू कुंवर सिंह के किला और उनके नाम को ही गौण कर दिया गया। बाबू साहब के साथ न्याय नहीं किया गया, इस बात को लेकर काफी अफसोस है। जितनी पोस्टर लगी थी उस पर कुंवर सिंह जी का फोटो तक नहीं अंकित था। 23 अप्रैल 2022 को विजय महोत्सव पर 78 हजार 200 ध्वज फहराने का दावा किया गया था। किले के जीर्णोद्धार के लिए 1 करोड़ खर्च किया जाएगा, इसकी सूचना जिलाधिकारी के हवाले से अखबार में दिया गया था। परंतु आज तक उसका मास्टर प्लान बना या नहीं बना इस बात की जानकारी नहीं है। इसको लेकर जिलाधिकारी से हमारी बातें होंगी तो उसमें हमलोग कुंवर सिंह जी की स्मृति जहां जहां प्रमुख है उसको जीवंत किया जाएगा। इससे पर्टयन का विकास होगा, इस इलाके में दूर-दूर से लोग आएंगे और देखेंगे तो इससे विकसित बिहार में शाहाबाद का नाम भी अंकित होगा।

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