महिला आरक्षण बिल का संसद में पेश होना नारी सशक्तिकरण की मिसाल है

आलेख

  • प्रो सुहेली मेहता

पटना: लगभग 27 वर्षों से लंबित महिला आरक्षण बिल को केन्द्रीय कैबिनेट से मजूरी मिलने के बाद कल नई संसद भवन में प्रवेश के साथ ही देश के यशस्वी प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी जी ने पहले सत्र के अपने पहले ही भाषण में महिला आरक्षण बिल के संसद में पेश होने की घोषणा की | देश के कानून मंत्री, अर्जुन राम मेघवाल ने “नारी शक्ति अधिनियम-2023” के नाम से इस बिल को लोकसभा में पारित किया | लोकसभा में बिल पास हो जाने के बाद इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा | महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में प्रधानमन्त्री जी का ये युगांतकारी कदम है | इसके लिए हम सभी महिलाओं की और से प्रधानमन्त्री जी को कोटि-कोटि आभार एवं अभिनन्दन | अनेक वर्षों से महिला आरक्षण पर बहुत चर्चाएं और वाद-विवाद हुए हैं। साल 1996 में इससे जुड़ा बिल पहली बार पेश हुआ था। अटल जी के कार्यकाल में कई बार महिला आरक्षण बिल पेश किया गया, लेकिन उसे पास कराने के लिए आंकड़े नहीं जुटा पाए। जिस वजह से अटल जी का वो सपना अधूरा रह गया जिसे नरेन्द्र मोदी जी ने पूरा करने की ओर मजबूत कदम बढ़ाया है | प्रधानमंत्री जी ने अपने इस कदम से साबित कर दिया कि महिला सशक्तिकरण सिर्फ एक नारा नहीं बल्कि उनका संकल्प है और हमारा विश्वास है कि उन्हें सिद्धि भी मिलेगी | जिस प्रकार महिलायें देश के विकास केलिए कहीं भी पीछे नहीं है बल्कि अपने स्वाभाविक डेडिकेशन के कारण ज्यादा हर क्षेत्र में ज्यादा अच्छा कर रहीं हैं और अपनी क्षमता को साबित कर रहीं हैं, यह अधिनियम महिलाओं के बड़े लेवल की नेतृत्व की क्षमता को भी साबित करेगा |
“नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023” भारत के संविधान का 128वाँ संशोधन विधेयक है | जो देश की आधी अवादी के विकास एवं सुरक्षा के मामले में मील का पत्थाद साबित होगा | देश के महत्वपूर्ण निति निर्धारण में जनप्रतिनिधि के रूप में सदन में मौजूद महिलायें अपना योगदान देंगी जो आधी अवादी केलिए गर्व का विषय है |
 सभी राज्यों के विधानसभा एवं लोकसभा में महिलाओं केलिए 33 प्रतिशत सीटें सुरक्षित होगी |
 सीटों की संख्या में 33 प्रतिशत अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों केलिए सीटें सुरक्षित होंगी |
 ये अधिनियम अगले 15 वर्षों तक प्रभावी रहेंगी |

परन्तु अफसोस की बात है कि विपक्ष इसकी क्रेडिट लेने की होड़ में जरुर लगा है लेकिन इसे पचा नहीं पा रहा है | और, इससे भी शर्मनाक बात यह है कि बस नाम केलिए कदम उठाने को छोड़कर, कांग्रेस कभी भी महिला आरक्षण के बारे में गंभीर नहीं रही है| कांग्रेस ने या तो विधेयकों को निष्प्रभावी होने दिया या सही तरीके से पेश नहीं किया या उसके सहयोगी दलों ने विधेयक को सदन के पटल पर पेश करने से रोका. विपक्ष का यह दोहरा मापदंड नहीं चलेगा चाहे वो कितनी भी कोशिश कर ले |

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