भारत की कूटनीति और राजनीति की हुई जीत

आलेख
  • मनोज कुमार श्रीवास्तव

भारत सरकार की अपील के बाद क़तर में कथित तौर पर जासूसी के आरोप में आठ पूर्व भारतीय नौसैनिकों की फांसी की सजा पर वहां की अदालत ने रोक लगा दी हैअब सजायाफ्ता की जगह इन भारतीयों को जेल में रहना होगा।इसकी जानकारी भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा दिया गया।कटर की कोर्ट ऑफ अपील ने फैसला गुरुवार को सुनाया।भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि फैसले की पूरी जानकारी का इंतजार है।इसके बाद ही कोई अगला कदम पर विचार किया जाएगा।सुनवाई के समय भारत के राजदूत अदालत में उपस्थित थे।इसके अलावा सभी नौसैनिकों के परिजन भी वहां थे।भारत ने इसके लिए स्पेशल काउंसिल नियुक्त किये थे।
दाहरा ग्लोबल केस में अपील कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पूर्व सैनिकों की सजा कम कर दी है। भारतीय मंत्रालय ने कहा कि क़तर में हमारे राजदूत और अन्य अधिकारी अपील कोर्ट में परिवार के सदस्यों के साथ मौजूद थे।हम शुरू से ही उनके साथ खड़े रहे हैं और भविष्य में भी हर तरह की कूटनीतिक और कानूनी मदद देते रहेंगे।ये सभी पूर्व अफसर दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी एंड कन्सलटेंसी सर्विसेज के लिए काम करते थे।उन्हें अगस्त 2022 में गिरफ्तार किया गया था।
नेवी के पूर्व अफसरों को किस मामले में गिरफ्तार किया गया, उन पर क्या आरोप लगाए गए, इसे लेकर न तो क़तर की तरफ से कुछ आधिकारिक तौर पर कहा गया है और न भारत की तरफ से।क़तर की निचली अदालत पिछले महीने 26 अक्टूबर को भारतीय नेवी के 8 अफसरों की मौत की सजा सुनाई थी।क़तर ने पूर्व नौसैनिकों की मौत की सजाय पर रोक लगा दी है।लेकिन यह फैसला अचानक नहीं आया बल्कि इसके पीछे बड़ी बैकचैनल पॉलिसी मानी जा रही है।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले की कार्यवाही की गोपनीयता और संवेदनशील प्रवृति के कारण इस समय कोई और टिप्पणी करने उचित नहीं होगा।बता दे कि इन पूर्व सैनिकों को बचाने के लिए भारत सरकार ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी।इसके लिए सरकार ने कटर की एक दूसरी अदालत में पूर्व नौसैनिकों को मिली मौत की सजा के खिलाफ अपील दायर की थी।क़तर ने आठों नौसैनिकों पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया था।
क़तर की सुरक्षा एजेंसी ने सभी को 30 अगस्त को गिरफ्तार किया था।ये सभी भारतीय नौसेना से रिटायर थे और दोहा में अल-दाहरा कम्पनी के लिए काम करते थे।सभी पर आरोप लगा था कि ये लोग इजरायल के लिए क़तर की सबमरीन प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी चुरा रहे थे। इन 8 नौसैनिक अधिकारियों में राष्ट्रपति से स्वर्ण पदक विजेता कैप्टन नवतेज गिल,कमांडर सुग्राकर पकाला,कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेन्दु तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा,कमांडर संजीव गुप्ता,कमांडर अमित नागपाल और सेलर रागेश हैं।
विदेश नीति के जानकारों की माने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कतर के शेख की इस मुलाकात और दोनों के बीच बने समीकरणों ने 8 भारतीयों की फांसी की सजा से राहत देने में बड़ा रोल निभाया है।उन्हें एक साल तक बिना मुकदमे के रखा गया।अब इनके वतन वापसी की उम्मीदें बढ़ गई हैं।भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने इसको लेकर खुशी जताई है।
भारत और कतर के बीच सजायाफ्ता के दिनों को एक दूसरे देश में स्थानांतरित करने का भी समझौता हुआ है।इसके तहत इन्हें एक निश्चित अंतराल के बाद शेष कैद की सजा काटने के लिए भारत भी भेजा जा सकता है लेकिन इन मुद्दों पर फैसला अपीलीय न्यायालय के फैसले के विस्तार से अध्ययन के बाद ही किया जाएगा।
समाचार एजेंसी एएनआई को दिये इंटरव्यू में सुशांत सरीन ने कहा,” मैं समझता हूं कि जीत भारत सरकार की कूटनीति की जीत है।भारत सरकार ने राजनीति और कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल करते हुए क़तर सरकार से बैकडोर बातचीत किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेशमंत्री एस जयशंकर और हमारा दूतावास इस बातचीत में डायरेक्टली शामिल रहे, लेकिन उन्होंने इस बातचीत को मीडिया में लीक नहीं होने दिया।”
खाड़ी देश क़तर में इजरायल के लिए जासूसी करने के आरोप में भारतीयों की फांसी पर रोक लगाने पर विदेशी मामलों के विशेषज्ञ सुशांत सरीन इसकी तारीफ करते हुए इसे भारत सरकार की कूटनीतिक की जीत करार दिया है।सरीन ने कहा कि क़तर को ये बात अछि तरह से मालूम था कि यदि वो भारत के पूर्व अधिकारियों को सजा देता है तो ये भारत के साथ उसके समझौते के खिलाफ होता।इसके साथ ही भारत सरकार ने भी क़तर की न्यायिक व्यवस्था का सम्मान करते हुए कूटनीति का इस्तेमाल किया है।

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