मजदूर को मजबूर समझना हमारी सबसे बड़ी भूल
मजदूर दिवस (1 मई विशेष) मेहनत उसकी लाठी है,मजबूती उसकी काठी है।बुलंदी नहीं पर नीव है,यही मजदूरी जीव है।मजदूर को मजबूर समझना हमारी सबसे बड़ी भूल है, वह अपने खून पसीने की कमायी खाता है। ये ऐसे स्वाभिमानी लोग होते है, जो थोड़े में भी खुश रहते है एवं अपनी मेहनत व लगन पर विश्वास […]
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