
डॉ. सुरेन्द्र सागर
पटना में आयोजित बढ़ई समाज संवाद कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मंत्री श्री ऋतुराज सिन्हा ने बढ़ई समाज के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण को लेकर एनडीए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि यह समाज भारत के सामाजिक ढांचे का आधार स्तंभ है और सदियों से ‘विश्वकर्मा के साक्षात अवतार’ के रूप में अपने श्रम, सेवा और कौशल से देश को मजबूती प्रदान करता आ रहा है। बिहार की 8000 से अधिक पंचायतों में बढ़ई समाज की सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका है। यह समाज अपने हुनर से न केवल पारंपरिक व्यवसाय को जीवित रखे हुए है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मज़बूती दे रहा है।उन्होंने कहा कि मोदी जी का ‘सबका साथ, सबका विकास’ और नीतीश जी की सामाजिक न्याय की नीति ने इस समाज को सम्मान, अवसर और सशक्तिकरण की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया है।
पीएम विश्वकर्मा योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक आर्थिक सहायता योजना नहीं है, बल्कि लोहार, बढ़ई, शिल्पकार जैसे पारंपरिक कारीगरों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाज़ार से जुड़ाव प्रदान करने वाली समग्र योजना है।साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने के निर्णय को उन्होंने सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया और भरोसा जताया किबढ़ई समाज आने वाले समय में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के रूप में भी सशक्त होगा।

प्रधानमंत्री की बिहार यात्राएं, विकास की गारंटी:ऋतुराज सिन्हा
डॉ. सुरेन्द्र सागर
पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों पर श्री सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी जितनी बार बिहार आते हैं, बिहार को उतनी ही बड़ी सौगात मिलती है। अब तक 84,000 करोड़ रुपये योजनाएं बिहार को समर्पित की जा चुकी हैं। इस बार भी पूर्णिया में एयरपोर्ट और कनेक्टिविटी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स का तोहफा बिहार को मिलने जा रहा है।
सीमांचल क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने इसे विकास की दृष्टि से संवेदनशील बताया और कहा कियह क्षेत्र सामाजिक दृष्टि से भी जटिल है, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था और समावेशी विकास दोनों की ज़रूरत है। केंद्र सरकार इस दिशा में लगातार प्रयास कर रही है।
अंत में श्री सिन्हा ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कुछ लोग दिनभर प्रधानमंत्री जी की आलोचना करते हैं, लेकिन जब श्रेय लेने की बात आती है तो उन्हीं के साथ मंच पर खड़े दिखते हैं। जनता सब देख रही है – कौन काम कर रहा है और कौन तमाशा।
कार्यक्रम में विनय मिस्त्री, विभीषण शर्मा सहित समाज के कई प्रमुख प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए।

