- शिक्षकों के संघर्ष के लिए निरंतर लड़ाई लड़ना और उन्हें मुकाम तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य हैः नवल
पटना: सुबह के 10 बजते ही जब अधिकांश लोग अपने दिन की शुरुआत की लय पकड़ रहे होते हैं, तब प्रो० नवल किशोर यादव अपने आवास पर जनसेवा की एक नई पारी शुरू कर चुके होते हैं। उनके दरवाजे पर लोगों की लंबी कतार इस बात का प्रमाण है कि वे केवल एक शिक्षक नेता या विधान पार्षद नहीं, बल्कि जनविश्वास के केंद्र हैं।
उनकी कार्यशैली का सबसे खास पहलू है-हर व्यक्ति को सम्मान देना। चाहे वह शिक्षक हो या आम नागरिक, हर किसी को बैठाकर उनकी समस्या को ध्यानपूर्वक सुनना और उसके समाधान की दिशा में तत्काल प्रयास करना उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सुबह 10 बजे से शुरू होकर यह सिलसिला दोपहर 1 बजे तक लगातार चलता रहता है, जहां वे बिना थके, बिना किसी भेदभाव के लोगों की समस्याओं का निपटारा करते हैं।
लेकिन उनका यह जनसेवा का सफर यहीं समाप्त नहीं होता। अपनी व्यक्तिगत दिनचर्या पूरी करने के बाद वे शाम 3 बजे फिर से अपने कार्यालय में बैठ जाते हैं। यहां भी वही ऊर्जा, वही समर्पण और वही तत्परता देखने को मिलती है। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में भाग लेना, छोटे से छोटे आमंत्रण को भी पूरे स्नेह और सम्मान के साथ स्वीकार करना, उनकी विनम्रता और सामाजिक जुड़ाव को दर्शाता है।
कम उम्र में प्रोफेसर बनना और उसी युवा अवस्था में शिक्षकों का नेतृत्व संभालना, अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है। लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि पिछले 30 वर्षों से वे इस जिम्मेदारी को निरंतर निभाते आ रहे हैं। यह केवल अनुभव का नहीं, बल्कि विश्वास और नेतृत्व क्षमता का भी परिचायक है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से भी उनका व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली है। उन्होंने कभी किसी को निराश नहीं किया। चाहे वह सदन में उनकी उपस्थिति हो या मीडिया के माध्यम से उनके विचार। उनकी बेबाक और स्पष्ट टिप्पणियां हर श्रोता को सोचने पर मजबूर कर देती हैं।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने कभी व्यक्तिगत लाभ या लालच को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। अपने ज्ञान, विद्वता और सादगीपूर्ण व्यवहार से उन्होंने हर वर्ग के लोगों को अपना प्रशंसक बना लिया है।
जब उनसे चुनाव को लेकर सवाल किया जाता है, तो उनका जवाब भी उतना ही विनम्र होता है-“मैं चुनाव नहीं लड़ता, बल्कि शिक्षक समाज मुझे चुनाव लड़ाकर सदन तक पहुंचाता है।” यह कथन उनके और शिक्षक समुदाय के बीच गहरे विश्वास और संबंध को स्पष्ट करता है।
चाहे वे सत्ता पक्ष में हों या विपक्ष में, उनका एकमात्र उद्देश्य हमेशा शिक्षकों के हितों की रक्षा करना और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करना रहा है। यही कारण है कि वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक आंदोलन, एक विचारधारा और एक भरोसे का नाम बन चुके हैं।
इस प्रकार, प्रो० नवल किशोर यादव का जीवन केवल राजनीतिक या शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनसेवा, समर्पण और निस्वार्थ नेतृत्व का एक जीवंत उदाहरण है।

