
डॉ. सुरेन्द्र सागर, आरा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भोजपुर जिले के संवाद सह समीक्षा यात्रा को लेकर पांच गावों के चयन के लिए जिला प्रशासन का उड़नदस्ता गाँवों की तरफ निकल पड़ा है लेकिन जिला प्रशासन का ध्यान उन गावों तक आज तक नहीं जा सका है जिन गाँवों का धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास त्रेता युग और द्वापर युग से जुड़ा हुआ है. त्रेता युग और द्वापर युग की स्मृतियों को अपने में समेटे जिले के इन गाँवों को आज भी सरकार के आने का इंतजार है. इन गाँवों में त्रेता युग और द्वापर युग के साक्ष्य आज भी देखने को मिलते हैं. हजारों साल पहले रचित धर्म ग्रंथों में इन गाँवों की चर्चा है.
उदवंतनगर प्रखंड के मसाढ़ – नवादा बेन गांव का राक्षसाधिराज सहस्त्राबाहु बाणासुर का 52 बीघे का तालाब – द्वापर युग में यहां राक्षसाधिराज सहस्त्राबाहु बाणासुर की नगरी हुआ करती थी. शिव पुराण के अनुसार बाणासुर अत्यंत शक्तिशाली था और भगवान शिव का परम भक्त था. उसने शिव की तपस्या कर अजेय होने का वरदान प्राप्त कर लिया था.बाणासुर की नगरी को प्राचीन काल में शोणितपुर के नाम से जाना जाता था जिसे अब मसाढ़ गांव के नाम से जाना जाता है. उसके द्वारा बनाये गए 52 बीघे के विशाल तालाब को आज भी साक्ष्य के तौर पर देखा जा सकता है. मसाढ़ और नवादा बेन गांव के बीच यह कारीसाथ रेलवे स्टेशन से सटा हुआ है. उसने अपनी बेटी उषा के लिए इस तालाब का निर्माण कराया था. यहीं पर द्वारकाधीश भगवान श्री कृष्ण और बाणासुर के बीच भीषण युद्ध हुआ था जिसमें भगवान शिव के आशीर्वाद से बाणासुर अमर हो गया था और अंततः द्वारकाधीश के पोते से बाणासुर की बेटी उषा का प्रेम विवाह सम्पन्न हुआ था. पुराने शोणितपुर और आज के मसाढ़ गांव के आसपास बाणासुर की नगरी के अवशेष और साक्ष्य आज भी पूरे इलाके में मौजूद है. नगरी के ईंट जमीन के नीचे दबे हुए हैं और खेतों में प्राचीन काल के ईंट के रोड़े बिखरे पड़े हैं. कहा जाता है कि बाणासुर लंकाधीपति रावण से भी अधिक ताकतवर था और उसने रावण को भी चेता रखा था कि शोणितपुर के इलाके से होकर वह कभी नहीं आए जाय.
आज बाणासुर के इस नगरी और उसके तालाब पर सरकार की नजर नहीं है. अगर संवाद यात्रा के दौरान सीएम नीतीश कुमार यहां जाते हैं तो द्वापर युग के इस महत्वपूर्ण स्थल के विकास को पँख लग जायेगा और इसकी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान का मार्ग प्रशस्त होगा.
फोटो -द्वापरयुग के शोणितपुर(अब मसाढ़) इलाके में स्थित मंदिर

फोटो -त्रेता युग के गंगा, सोन और सरयू के संगम स्थल पर गंगा आरती में उमड़ी भीड़, यहीं भगवान श्री राम और लक्ष्मण ने महर्षि विश्वामित्र मुनि के साथ पार किया था गंगा नदी को –
भोजपुर जिले के कोइलवर प्रखंड का बिन्दगाँवा स्थित गंगा, सोन और सरयू के संगम स्थल संगमेश्वर धाम –
भोजपुर जिले के बिन्दगाँवा गांव स्थित गंगा, सोन और सरयू नदी के त्रिवेणी संगम का धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास त्रेता युग का है और गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में इस स्थल का बखान किया है. महर्षि विश्वामित्र मुनि के साथ धनुर्विद्या का ज्ञान प्राप्त करने जब भगवान श्री राम अपने भ्राता लक्ष्मण के साथ सरयू नदी के रास्ते बक्सर आ रहे थे तब त्रेता युग में छपरा जिले के चिरान गांव के सामने यही गंगा, सोन और सरयू नदियों के संगम स्थल पर पहुँच कर गंगा नदी को पार किया था. गंगा नदी पार करने के बाद श्री राम, लक्ष्मण जंगल के रास्ते आगे बढ़े तो जंगलों की देवी आरण्यदेवी मिली जहां उन्होंने माता आरण्यदेवी की पूजा अर्चना की और फिर आगे बढ़े जहां बक्सर पहुँच कर ऋषि मुनियों के यज्ञ में बाधा पहुंचा रही राक्षसी ताड़का का वध किया.
कोइलवर प्रखंड के बिन्दगाँवा स्थित त्रिवेणी संगम पर अगर सीएम अपनी संवाद यात्रा के दौरान जाते तो इस प्राचीन स्थल के विकास को नई गति मिल जाती और संगमेश्वर धाम की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचनेका मार्ग प्रशस्त होता.
भोजपुर के इन दो प्रमुख गाँवों की तरफ जिला प्रशासन और राज्य व केंद्र सरकार का ध्यान नहीं है. अगर सीएम नीतीश कुमार को इन दोनों स्थलों के बारे में सही जानकारी दी जाय तो निश्चित ही वे भोजपुर के ऐसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को समेटे गाँवों का दौरा कर सकते हैं और भोजपुर के सम्पूर्ण एवं सर्वाँगीण विकास को नई उड़ान मिल सकती है. जिला प्रशासन को इन गाँवों की सूची सीएम की संवाद सह समीक्षा यात्रा के लिए अवश्य जोड़ने की पहल करनी चाहिए.

