बक्सर: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सदन बक्सर में प्रतिदिन अधिवक्ताओं द्वारा दो पक्षों के बीच मध्यस्थता कराने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है।मध्यस्थता एक वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रिया है।जिसमें एक पक्ष मध्यस्थ जो एक निष्पक्ष तीसरा पक्ष होता है,पक्षों को उनके विवादों को सुलझाने में मदद करता है।मध्यस्थता एक स्वैक्षीक्,गोपनीय और लागत प्रभावी प्रक्रिया है।
मध्यस्थता, अदालती कार्यवाही का विकल्प है।जहां दो या दो से अधिक पक्ष एक मध्यस्थता की मदद से अपने विवादों को सुलझाने का प्रयास करते हैं।यह एक अनौपचारिक प्रक्रिया है।जिसमें मध्यस्थता पक्षों को एक -दूसरे से बात करने और समझौते पर पहुंचने में मदद करता है।
मध्यस्थता विवाद का निर्णय नहीं देता बल्कि वह दोनों पक्षों से एक-दूसरे की बात सुनने और समझने में मदद करता है।मध्यस्थता अब विवादों के समाधान का पसंदीदा तरीका बनते जा रही है न कि केवल एक गौड़ तंत्र।लम्बित सुधारों, न्यायिक पुनर्संतुलन, संस्थागत विकास और मध्यस्थता के लगती गहरी होती सांस्कृतिक प्रतिबद्धता के माध्यम से भारत एक ऐसा मॉडल गढ़ रहा है जो न केवल वैश्विक मानकों में अनुरूप है बल्कि अपने विशिष्ट कानूनी और आर्थिक सन्दर्भ से भी प्रतिबंधित करता है।
यदि सभी लोग विचारशील सहभागिता और निरन्तर नवाचार के साथ इस गति को बनाये रखें तो न केवल भारत मध्यस्थता के लिए एक सक्षम स्थल के रूप में कार्य करेगा बल्कि इससे इसके भविष्य को आकार देने में भी मदद मिलेगी।

