— ऐतिहासिक धरती पर शिक्षा, संस्कृति और नवाचार का होगा संगम
डुमरांव। आगामी 31 अगस्त को नगर के एक प्रतिष्ठित सभागार में “सेमिनार सह महर्षि विश्वामित्र गुरु सम्मान 2025” का आयोजन किया जा रहा है। इस भव्य कार्यक्रम की जानकारी विकास फैमिली क्लब परिवार के संस्थापक मनोज मिश्रा ने दी। उन्होंने बताया कि यह आयोजन शिक्षक दिवस से पूर्व देशभर के समर्पित और नवाचार करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम में बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़, असम, जम्मू-कश्मीर सहित करीब 10 राज्यों के शिक्षक और शिक्षाविद भाग लेंगे। सभी को उनकी शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवा, नवाचार एवं समर्पण के लिए “महर्षि विश्वामित्र गुरु सम्मान 2025” से अलंकृत किया जाएगा।
सेमिनार : शिक्षा में बदलाव पर होगा विचार-विमर्श
कार्यक्रम की शुरुआत “शिक्षा में बदलाव” विषयक सेमिनार से होगी। इस सेमिनार में शिक्षा नीति, नवाचार, मूल्य आधारित शिक्षा और परंपरा के समन्वय पर विशेषज्ञ वक्ता अपने विचार रखेंगे। यह आयोजन न केवल शिक्षकों को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बनेगा।
आयोजन स्थल का ऐतिहासिक महत्व
कार्यक्रम का आयोजन उस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल पर हो रहा है, जहां भगवान श्रीराम ने महर्षि विश्वामित्र से शिक्षा प्राप्त की थी, ताड़का वध किया था और माता अहिल्या का उद्धार कर धर्म की पुनः स्थापना की थी। इस पावन भूमि पर गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान में हो रहा यह कार्यक्रम विशेष महत्व रखता है।
एक्टिव टीचर्स एंड स्टूडेंट ग्रुप की भी सहभागिता
इस आयोजन में “एक्टिव टीचर्स एंड स्टूडेंट” फेसबुक ग्रुप के सैकड़ों सदस्य भी शामिल होंगे, जो देशभर के शिक्षकों और छात्रों को जोड़ने वाला एक सक्रिय मंच है। ग्रुप के माध्यम से शिक्षकों का उत्साहवर्धन और नवाचारों का प्रसार होता रहा है।
सम्मान से बढ़ेगा शिक्षकों का मनोबल
संस्थापक मनोज मिश्रा ने बताया कि यह सम्मान उन शिक्षकों को समर्पित है, जिन्होंने शिक्षा में रचनात्मक परिवर्तन, सेवा भाव और नवोन्मेष को बढ़ावा दिया है। पिछले वर्ष इस कार्यक्रम में बिहार के कई जिलों से शिक्षक शामिल हुए थे, इस वर्ष और व्यापक स्तर पर आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने सभी शिक्षा प्रेमियों, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और मीडिया प्रतिनिधियों से इस गरिमामय समारोह में सहभागिता करने का आह्वान किया है, ताकि यह आयोजन शिक्षा और संस्कृति के समन्वय का एक यादगार अध्याय बन सके।

