अरवल जिला में बेलखारा गांव की बदली तस्वीर पंकज रंजन जी की मेहनत लाई रंग खुलेगा मेडिकल कॉलेज

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THE INK DESK- अरवल जिला ग्राम…. बेलखारा ? बात किया जाए अरवल के बेलखारा गांव की तो कई तस्वीरें भी बदली है आपको बता दे की पंकज रंजन कुशवाहा समाज से आते हैं और समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं।

आपको बता दे की अरवल के बेलखारा की तस्वीर पंकज रंजन ने बिल्कुल बदल कर रख दिया एक एकड़ 28 डिसमिल भूमि खेल मैदान के लिए पंकज रंजन कुशवाहा के परिवार ने दान कर दिया भु दान का मतलब है कि वह व्यक्ति जो अपनी जमीन का एक हिस्सा भूमिहीन किसानों को दान करता है भूदान आंदोलन की शुरुआत गांधीवाद विनोबा भावे ने साल 1951 में की थी इस आंदोलन का मकसद भूमिहीन को जमीन देना था इस भूदान की योजना को बिहार के अरवल जिला के बेलखारा में जदयू शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज रंजन कुशवाहा के परिजनों द्वारा खेल मैदान के लिए एक एकड़ 28 डिसमिल भूमि दान कर गांव के विकास में अहम योगदान दिया है।

आपको बता दे खेल मैदान का नाम पंकज रंजन जी के पिता स्वर्गीय प्रोफेसर अंबुज कुमार वर्मा जी के दादाजी और पंकज कुशवाहा जी के परदादा जी प्रयाग दत्त के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया है पंकज रंजन के परदादा का जन्म 1878 में हुआ था इन्होंने पहली बार वर्ष 1913 में अरवल जिले के बेलखारा गांव में भारत का दूसरा तथा बिहार का पहला कुशवाहा सम्मेलन कराया था जिसमें देश की नामी गिराम हस्तियों ने शिरकत किया था बात दूर की है जब बेलखारा के प्रतिष्ठा जमींदार प्रयाग दत्त ने गांव और समाज के लिए बहुत कुछ किया गांव में स्कूल और अस्पताल का भी जमीन इन्होंने दान कर दिया है जिसकी प्रशंसा देश भर में की जाती है।

वही अपने परदादा को आदर्श मानने वाले पंकज रंजन कुशवाहा का जीवन भी समाज सेवा में अक्सर गुजरा रहा है इन्होंने अपने पारिवारिक विरासत को संभालते हुए समाज के हर वर्ग हर जाति धर्म के लिए खड़े रहते हैं फिलहाल पंकज रंजन जदयू में प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत है यह हमेशा सीएम नीतीश कुमार के बेहद करीब रहे हैं।

पंकज रंजन कुशवाहा अपने सामाजिक जीवन से बाहर राजनीतिक दुनिया में करीब 18 साल पहले कदम रखे थे उन्होंने अपने पिता प्रोफेसर अंबुज कुमार वर्मा से प्रेरित होकर तथा अपने परदादा को आदर्श मानकर बिहार के विकास पुरुष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने JDU से जुड़ गए यहां उनकी कार्यशैली को देखते हुए पार्टी ने उन्हें जदयू शिक्षा प्रकोष्ठ का उपाध्यक्ष बना दिया जिसका बेखुदी निर्वहन करते हुए पंकज रंजन अपने सामाजिक कार्यों से अपने इलाके के लोगों में काफी प्रिय माने जाते हैं इनका सपना है कि हमारे इलाके का निरंतर विकास हो यहां के युवा पढ़ाई कर बेहतर जगह को पा सके ताकि किसी प्रकार की उन्हें परेशानियों का सामना न करना पड़े।

अरवल जिला का बेलखारा गांव जो किसी जमाने में अग्रेजों की ह्यूमत का एक स्टेट हुआ करता था वहां के दयालु जमींदार प्रयाग दत्त जी हुआ करते थे

महान समाज सुधारक प्रयाग दत्त जी की जीवनी

प्रयाग दत्त जी का जन्म 1878 ईस्वी में ग्राम बेलखारा जिला अरवल पुराना जिला गया नया अरवल बिहार में हुआ था इनके पिता फूलचंद प्रसाद एक दयालु जमींदार प्रयागदत्त जी की अपने समाज में व्याप्त शिक्षा गरीब एवं कुरीतियों से अत्यंत दुखी थे प्रयाग दत्त की हमेशा समाज सुधार के लिए सोचते थे इसी बीच मिर्जापुर निवासी श्री हरिप्रसाद जी वैष्णव इलाके नाम से अखिल भारतीय कोईरी हितकारिणी महती सफा यानी कुशवाहा महासभा का 29 30 31 दिसंबर 1912 के होने वाला अधिवेशन का निमंत्रण पत्र भेजा प्रयाग दत्त की निमंत्रण प्रकार अत्यंत प्रसन्न हुए।

प्रयाग दत्त की इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए कई व्यक्तियों के साथ सम्मेलन में और तीनों दिन भाग लिए सम्मेलन में प्रस्ताव पारित किया गया कि कोईरी के सभी शाखोंओं के लोग आपस में रोटी बेटी का संबंध स्थापित करें गरीबी दूर करने का प्रयत्न करें एवं विद्या का प्रचार करें और एक समय वह आया सन् 1913 दिसंबर 31/ 29.30.31 जब बेलखारा जिला गया बिहार का पहला और भारत वर्ष का दूसरा सम्मेलन बड़े धूमधाम से समापन हुआ जिसका श्रेय प्रयाग दत्त जी को दिया गया था इस सम्मेलन में प्रयाग दत्त की कोईरी हितकारिणी माहती सभा कुशवाहा सभा का अध्यक्ष भी चुने गए।

आज भी पंकज रंजन अपने परदादा के आदर्शों पर चल रहे हैं उन्होंने कहा कि नीतीश सरकार में अरवल के बेलखारा की जो तस्वीर बदली है एक एकड़ 28 डिसमिल भूमि खेल मैदान के लिए पंकज कुशवाहा के परिवार ने दान किया वह चाहते हैं सीएम नीतीश कुमार उसे खेल मैदान का नाम पंकज रंजन जी के परदादा के नाम पर विचार कर सके।


उसी उसी कड़ी में मानिए मुख्यमंत्री द्वारा अरवल जिला में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की घोषणा की गई
पंकज रंजन ने माननीय उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक आवेदन लिखा 21 अगस्त 2025 को जमीन का विवरण देते हुए अपने ग्राम बेलखारा में इस मेडिकल कॉलेज की स्थापना की आग्रह किया माननीय उपमुख्यमंत्री ने उनके आवेदन को स्वीकार किया और अरवल जिला अधिकारी के द्वारा जमीन की मापी हुई और कॉलेज की घोषणा बेलखारा के लिए की गई समस्त बेलखारा वाशी अत्यंत प्रश्न हुऐ और मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री को पूरा अरवल वासी और बेलखारा निवासी ने शुभकामनाएं एवं बधाई दिया ।


एक बार फिर से बेलखारा गांव सुर्खियों में है और अरवल जिला का एक समृद्ध इतिहास में 1913 जो बिहार की समस्त कुशवाहा बंधु के इतिहास को याद ताजा कर दिया जो प्रयाग दत्त जी ने बिहार का पहला कुशवाहा सम्मेलन और कुशवाहा के एकजूट होने के लिए प्रयास किया था वह गांव सुर्खियों में फिर से आ गया अब माननीय मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से आग्रह होगा कि कुशवाहा की मर्यादा को ओर सन् 1913 की ऐतिहासिक कुशवाहा सम्मेलन का ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज का नामकरण श्री प्रयाग दत्त जी के नाम पर विचार किया जाए।
नम्र निवेदन…..

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