आनंद मोहन और उनके समर्थकों ने बिहार की चारों सीट पर लहराया एनडीए का परचम, एक बार फिर एनडीए के महानायक बनकर उभरे वाजपेयी को समर्थन देने से लेकर नीतीश की सरकार बचाने वाले पूर्व सांसद आनंद मोहन

देश

सुरेन्द्र, आरा कार्यालय
बिहार  विधानसभा  उपचुनाव में चार की चार सीटों पर एनडीए की शानदार जीत  हुई है. इस जीत के पीछे की रणनीति और रणनीतिकारों की भूमिका की समीक्षा में राजनैतिक पंडित जुट गए हैं. राजनैतिक विश्लेषकों की टीम  एनडीए की जीत के गणित मिलाने में  जुटी हुई हैं.
एनडीए की जीत के लिए तरारी, रामगढ़, इमामगंज और बेलागंज में भाजपा, जदयू, हम, लोजपा (आर) और रालोमो के प्रमुख नेताओं ने अपने परम्परागत वोट बैंक को एनडीए प्रत्याशियों के पक्ष में गोलबंद करने की कोशिश की और उसमें वह सफल भी रहे. इन नेताओं के अपने परम्परागत वोट बैंक को एनडीए प्रत्याशियों के पक्ष में गोलबंद करने के बावजूद राजद, कांग्रेस, भाकपा, भाकपा माले और वीआईपी को एकसूत्र में बाँधने वाला इण्डिया एलायंस  एनडीए पर भारी पड़ रहा था और चारों सीट पर उसके जीत की संभावनाएं  बढ़ी हुई थी.
इसी बीच कभी बिहार पीपुल्स पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष रहे  पूर्व सांसद  आनंद मोहन ने बिहार के बेलागंज सीट को सबसे अधिक मतों के अंतर से जितने को लेकर कमान संभाला तो राज्य भर के उनके समर्थकों की सक्रियता  भी बढ़ गई. बिहार के रामगढ़, तरारी और इमामगंज में फ्रेंड्स ऑफ आनंद के कार्यकर्ताओं ने कमर कस लिया और इन सभी सीटों को जीत लेने के लिए आनंद मोहन के समर्थकों ने जी जान लगा दिया.कैमूर जिले के फ्रेंड्स ऑफ आनंद के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रामगढ़ में जगह जगह  कई बैठकें की,जीत की रणनीति बनाई और सघन जनसम्पर्क के साथ अपने परम्परागत वोट बैंक को एनडीए प्रत्याशी अशोक  कुमार सिंह के पक्ष में ट्रांसफर करा दिया. रामगढ़ में करीब  11000 से 12000 वोट फ्रेंड्स ऑफ आनंद ने अपने समर्थकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं के बदौलत एनडीए के पक्ष में ट्रांसफर कराकर जीत सुनिश्चित कर दी.
तरारी विधानसभा क्षेत्र में एनडीए प्रत्याशी विशाल प्रशांत की जीत को लेकर फ्रेंड्स ऑफ आनंद के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तो पूरी ताकत झोंक दी थी. कभी पूर्व सांसद आनंद मोहन को अपना बड़ा भाई बताते हुए उनके पक्ष में दहाड़ने वाले तत्कालीन विधायक सुनील पाण्डेय का ऋण उतारने के लिए तरारी सीट पर आनंद मोहन समर्थकों ने व्यापक रणनीति बनाई और अपने परम्परागत  वोट बैंक को जन सुराज की तरफ बिखरने से रोकने की दिशा में बड़े स्तर पर कार्य किया. फ्रेंड्स ऑफ आनंद ने अपने मतदाताओं के बीच सघन जनसंपर्क अभियान चलाया और तरारी में 12000 से 14000 वोट अपने दम पर एनडीए के पक्ष में ट्रांसफर कराकर प्रशांत किशोर की रणनीति को फेल कर दिया और एनडीए उम्मीदवार विशाल प्रशांत की शानदार जीत सुनिश्चित कर पूर्व विधायक सुनील पाण्डेय का भी ऋण उतार दिया.विशाल प्रशांत को यहां कुल 78,755 वोट मिले. इसमें आनंद मोहन के समर्थकों की बड़ी भूमिका रही.
इमामगंज में पूर्व सांसद आनंद मोहन के समर्थको ने अपने बलबूते करीब 8500 से 9500 वोट मैनेज किये और उसे एनडीए प्रत्याशी दीपा मांझी को ट्रांसफर कराया. यहां भी फ्रेंड्स ऑफ आनंद ने जीत की लकीर खींची.
बेलागंज में खुद पूर्व सांसद आनंद मोहन और सांसद लवली आनंद ने कमान संभाल लिया था. नतीजा हुआ कि यहां फ्रेंड्स ऑफ आनंद के कार्यकर्ता सबसे अधिक सक्रिय रहे और एक एक बूथ पर उनकी पकड़ बनी रही.चुनाव के दिन बड़ी संख्या में  एनडीए के पक्ष में मतदाताओं ने वोट डाले. परिणाम हुआ कि पूर्व सांसद आनंद मोहन और सांसद लवली आनंद ने बेलागंज के तमाम समीकरणों को ध्वस्त करते हुए राजद का किला उखाड़ फेंका. यहां एनडीए से चुनाव लड़ रही जदयू उम्मीदवार मनोरमा देवी को अप्रत्याशित वोट मिले. उन्हें 73,334 वोट मिले और  राजद उम्मीदवार को जबरदस्त पटकनी देते हुए उन्होंने  21,391 वोटों के अंतर से विधानसभा उपचुनाव जीत लिया.
इस तरह जहां रामगढ़ में एनडीए उम्मीदवार के जीत का अंतर मात्र 1,362 वोटों का रहा वहीं तरारी में जीत का अंतर 10,612, इमामगंज में जीत का अंतर 5,945 जबकि बेलागंज मे जीत का अंतर सबसे अधिक 21,391 वोटो का रहा.
इस तरह बिहार विधान सभा के उप चुनाव में राज्य की चारों सीटों पर पूर्व सांसद आनंद मोहन और उनके समर्थकों ने एनडीए की जीत में बड़ी भूमिका निभा कर साबित कर दिया कि बिहार की राजनीति में जिधर आनंद मोहन होंगे पलड़ा उसी का भारी रहेगा और जीत निश्चित उसी की होगी.कभी बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनाने और फिर साल 2024 में बिहार में नीतीश कुमार की सरकार को बचाने में अपनी  बड़ी भूमिका निभाने वाले बिहार के बड़े नेता पूर्व सांसद आनंद मोहन ने एक बार फिर चारों सीटों पर एनडीए का विजय पताका लहराने में अपनी ताकत और जनाधार का अहसास कराया है. कभी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विश्वास मत के दौरान सांसद रहते संसद में खुलकर समर्थन देने वाले आनंद मोहन एक बार फिर बिहार में एनडीए की राजनीति के महानायक बन कर उभरे हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *