जगदीशपुर- 1857 के प्रथम वीर सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह संग्रहालय, जगदीशपुर की मरम्मती के लिए कला-संस्कृति एवं युवा विभाग के द्वारा 20 लाख से अधिक की राशि के आवंटन के लिए राष्ट्रीय कुंवर वाहिनी की राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज सिंह उर्फ लव जी ने प्रसन्नता जाहिर की है। उन्होंने इस संदर्भ में कहा कि हमारी कई महीनों से अनेक मांगें थीं, जिसमें से एक मांग को राज्य सरकार द्वारा पूरा किया गया है। इस राशि के आवंटन हो जाने से जीर्ण शीर्ण अवस्था में पड़ा संग्रहालय एकबार पुनः अपने अस्तित्व को कायम रख पाएगा। इसके बन जाने से यहां आने वाले लोगों को काफी सहूलियत होगी। श्री सिंह ने ये भी कहा कि बाबू वीर कुंवर सिंह हमारी धरोहर हैं, इनके सम्मान में राज्य सरकार ने भी बहुत कुछ स्थापित किया है। मगर जगदीशपुर में बाबू साहब की स्मृति को कायम रखना इसलिए जरुरी है क्योंकि यही वो भूमि है जहां से वीर कुंवर सिंह ने सभी जाति-धर्म को साथ लेकर 1857 में गदर की शुरुआत की थी, उनकी जन्मभूमि हमारे लिए आदर की भूमि है।

राष्ट्रीय कुंवर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज कुमार सिंह उर्फ लवजी ने आगे ये भी कहा कि कुंवर सिंह के किले के रखरखाव और 23 फूट की प्रतिमा को लगाने के लिए मैं बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और दिल्ली का दौरा कर चुका हूं इसके अलावे अन्य प्रांतों का दौरा करना है। इस दौरान बाबू कुंवर सिंह जी के इतिहास से परिचित कराने के लिए लेखक मुरली मनोहर श्रीवास्तव द्वारा लिखित पुस्तक ‘वीर कुंवर सिंह की प्रेमकथा’ पुस्तक को भेंट कर रहा हूं ताकि लोगों को कुंवर सिंह जी के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त हो सके। साथ ही श्री सिंह ने कहा कि लोगों से किले के संरक्षण और प्रतिमा को पुनर्स्थापन के लिए सबको साथ आने का आह्वान भी कर रहा हूं। ये वही भूमि है जिसका नाम गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।

