विधानसभा चुनाव-2025 के मुख्य राजनीतिक परिदृश्य, प्रमुख ताकतें, चुनौतियाँ और मेरी व्यवस्थित अनुमान प्रस्तुत कर रहा हूँ कि किस गठबंधन के बने रहने या सत्ता बदलने के क्या-क्या संकेत हैं।
बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं; सरकार बनाने के लिए 122 सीटों का आंकड़ा बहुमत है। सामाजिक-जातीय संरचना काफी महत्वपूर्ण है। हालिया 2022-कैस्ट सर्वे में यहाँ की आबादी में EBC (बहुत पिछड़ी जातियाँ) 36 %, OBC 27 % है यानी दोनों मिलकर 63 % वोट बैंक बनाते हैं। मतदान में पहले चरण में 64.66% तक पहुंचा, जो पिछले चुनाव की तुलना में बढ़ोतरी है।
वर्तमान में सत्ता में यह गठबंधन है और उन्हें संगठन, शासन-अनुभव और संसाधनों में बढ़त मिली हुई है। सर्वेक्षणों के अनुसार ये गठबंधन लगभग 150 सीटों तक जीतने की स्थिति में दिख रहा है। NDA ने वोट शेयर 49% तक का अनुमान पाया है-जो कि बहुमत के लिए पर्याप्त दिखता है। RJD-केंद्रित विपक्षी गठबंधन को ~60-65 सीटों तक का अनुमान है, यानी सरकार बनाने से काफी पीछे दिख रहा है। कांग्रेस और अन्य साथी दलों को अभी तक बड़े उत्थान के संकेत नहीं मिले हैं, संगठनात्मक चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
जनसुराज पार्टी जैसी-नवीन पार्टियाँ उभरती दिख रही हैं, 2-5 सीटों तक का अनुमान है। यदि यह तीसरा मोर्चा चुनाव में अच्छी पकड़ बना लेता है, तो यह परिणाम को प्रभावित कर सकता है जातीय समीकरण: EBC-OBC वोट बैंक बहुत बड़ा है और उस पर दोनों पक्षों का फोकस है। बेरोजगारी, युवा-माइग्रेशन: विशेषकर युवा वर्ग का असंतोष एक बड़ा मुद्दा है। सीट-बंटवारा एवं गठबंधन-प्रबंधन: (सहयोगी दल) के बीच सीट बंटवारे पर टकराव है, जो गठबंधन की मजबूती को प्रभावित कर सकता है।
इन सब बातों को मिलाकर मेरा निष्कर्ष यह है कि सबसे संभावित है कि NDA गठबंधन सरकार बनाए — अर्थात् BJP-JD(U) आदि की अगुवाई में। उनका अनुमानित आंकड़ा ~150 सीटों के करीब है, जो कि 122 की तुलना में काफी बेहतर है। विपक्षी मोर्चा इस बार पूरी तरह से पलटफेर करने की स्थिति में नहीं दिख रहा है, उनके सामने सीमित विकल्प और संगठनात्मक चुनौतियाँ हैं। हालांकि अगर मतदान में कोई बड़ा बदलाव आए (उदाहरण के लिए युवा वोट बहुत अधिक जाएँ, तीसरा मोर्चा असर दिखाए या सीट-बंटवारा में गड़बड़ी हो) – तो परिणाम अप्रत्याशित भी हो सकते हैं।

