बिहार की राजनीति में नीतीश का विकास और महिलाओं की भागीदारी ने जीत की लिखी इबारत

आलेख

-मुरली मनोहर श्रीवास्तव
बिहार की राजनीति लंबे समय तक जातीय ध्रुवीकरण, आर्थिक ठहराव और सामाजिक असमानताओं के मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती रही। ऐसे परिदृश्य में जब विकास, सुशासन और सामाजिक समावेशन जैसे मुद्दों ने प्रमुखता पाई, उस बदलाव के केंद्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीति और विशेष रूप से महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक-सामाजिक भागीदारी की भूमिका निर्णायक मानी जाती है। यह विकास आधारित राजनीति और महिला सशक्तीकरण का संगम ही था जिसने बिहार में नयी राजनीतिक इबारत लिखी। बिहार की राजनीति में इस बार बक्सर विधानसभा क्षेत्र की महिलाओं ने जिस तरह अपनी सक्रियता, जागरूकता और मतदान प्रतिशत से नई मिसाल पेश की है, उसने पूरे राज्य के राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विकास के प्रति उम्मीद, सामाजिक सुरक्षा की चाह और आर्थिक सशक्तीकरण की आकांक्षा से प्रेरित महिलाओं ने न सिर्फ विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाई बल्कि बिहार की राजनीति में एक नई लकीर खींच दी है।
बिहार की विभिन्न विधानसभा सीटों, पर इस बार महिलाओं की भागीदारी में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही महिलाओं की लंबी कतारों ने साबित कर दिया कि वे अपने भविष्य को लेकर पहले से कहीं अधिक सजग हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में महिलाओं ने विकास से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता दी, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं,पेयजल एवं स्वच्छता, महिला सुरक्षा, स्वरोजगार के अवसर इन वास्तविक मुद्दों ने माहौल को बदला और महिलाओं के मत ने चुनावी परिणामों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महिलाओं के विकास की आकांक्षा बनी निर्णायक शक्ति बक्सर की महिलाओं में यह समझ अब और गहरी हो गई है कि उनके वोट उनकी जिंदगी को सीधे प्रभावित करते हैं। जिन क्षेत्रों में सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ, वहां महिलाओं का मतदान प्रतिशत काफी बढ़ा। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक मजबूती पाने वाली महिलाओं ने भी बड़े पैमाने पर मतदान किया। छात्राओं और युवा महिला वोटरों ने शिक्षा और रोजगार को प्रमुख मुद्दा बनाया। इन सभी कारकों के चलते महिलाओं ने न सिर्फ मतदान बढ़ाया बल्कि उम्मीदवार चयन में भी प्रगतिशील सोच की झलक दिखाई।
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का चरण इस बात का उदाहरण है कि यदि नेतृत्व सामाजिक न्याय और विकास दोनों को साथ लेकर चले, तो व्यापक परिवर्तन संभव है।
महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और उनका विश्वास बिहार की चुनावी राजनीति में पहली बार इतनी निर्णायक शक्ति के रूप में उभरा। विकास की नीतियों और महिलाओं के सशक्तिकरण ने मिलकर वह आधार तैयार किया जिसने बिहार में जीत की इबारत लिखी—एक ऐसा राजनीतिक मॉडल, जिसकी चर्चा पूरे देश में हुई और जिसने राजनीति को जनकल्याण केंद्रित दिशा देने का काम किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *