- मुरली मनोहर श्रीवास्तव
पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भाजपा के लिए एक बड़ी सफलता की कहानी रही है, खासकर मगध और शाहाबाद क्षेत्रों में। इन दोनों प्रदेशों में पिछली बार भाजपा का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा था लेकिन राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा की सक्रिय भूमिका और कुशल रणनीति ने पार्टी को दोबारा जीत की राह पर ला दिया है।
भाजपा ने इस साल चुनावों से पहले बिहार को पांच बड़े चुनावी क्षेत्रों में बांटा था। उन क्षेत्रों में मगध-शाहाबाद ज़िम्मेदारी ऋतुराज सिन्हा को दी गई थी। इस क्षेत्र में ऑपरेशन शाहाबाद” नामक रणनीति तैयार की गई, जिसका लक्ष्य था एनडीए की खोई जमीन वापस पाना।
कुछ ही दिनों में, सिन्हा ने एक “सर्जिकल स्ट्राइक” करते हुए पवन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा को साथ लाने में सफलता पाई। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि पवन सिंह की पिछली स्वतंत्र चुनावी भागीदारी ने कुशवाहा की लोक सभा हार में बड़ी भूमिका निभाई थी। इस एकजुटता ने शाहाबाद-मगध क्षेत्र के राजपूत और कुशवाहा वोट को भाजपा के पक्ष में वापस लाने में मदद की। युवाओं से संवाद में उन्होंने कहा कि बिहार का विकास युवा शक्ति के बिना सम्भव नहीं है और पार्टी को बूथ-स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी। इसके अलावा, उन्होंने ”बेहतर बिहार संवाद” कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा, गरीबी उन्मूलन और संगठनात्मक मजबूती जैसे मुद्दों पर पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई।
पिछली विधानसभा एवं लोकसभा चुनावों में, भाजपा को शाहाबाद-मगध क्षेत्र में बेहद कमजोर प्रदर्शन करना पड़ा था। सिन्हा ने माना कि यह एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने कहा कि राजग “विकास, सुशासन और विश्वास” के एजेंडों के साथ लोगों को वापस जोड़ेगा। सिन्हा की मेहनत ने यह संदेश दिया है कि पार्टी सिर्फ प्रचार नहीं करना चाहती, बल्कि स्थानीय मुद्दों को समझते हुए गहराई से काम कर रही है। स्थानीय मतदाताओं को यह भरोसा मिला है कि भाजपा अब “वापसी की पार्टी” के रूप में न केवल चुनाव जीत रही है, बल्कि विकास और प्रतिनिधित्व की दिशा में भी गंभीर है।

