
आरा कार्यालय
भोजपुर जिले के अलग अलग प्रखंडो में पैक्सों के माध्यम से चल रहे धान अधिप्राप्ति के कार्य में सरकार की कटौती नीति ने पैक्सों और किसानों के समक्ष दोहरी
परेशानी खड़ी करके रख दिया है। वर्ष 2025-26 के लिए किसानो से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीद शुरू हो गई है।भोजपुर में धान की पैदावार भी पहले से काफी बेहतर हुई है।इस स्थिति में पैक्सों को किसानों से धान खरीद करने का लक्ष्य गत वर्षों की तुलना में और अधिक बढ़ाना चाहिए था, लेकिन सरकार ने बेहतर उत्पादन और पैदावार होने के बावजूद पैक्सों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की खरीददारी करने के लक्ष्य में तीस प्रतिशत की कटौती कर दी है। एक तरफ किसान जहां पैक्सों के पास पहुंचकर अधिकाधिक धान खरीद करने के लिए दबाव बना रहे हैं वहीं तीस प्रतिशत की कटौती किये जाने के बाद पैक्सों की लाचारी सामने आ रही है। पैक्स निर्धारित लक्ष्य से अधिक धान की खरीद नहीं कर सकता है। ऐसी स्थिति में पैक्सों
और किसानों के बीच तनाव की स्थिति बनती जा रही है। किसानों के दबाव के आगे पैक्स लाचार और बेबस बना हुआ है।

अगियांव प्रखंड के किरकिरी पंचायत के पैक्स अध्यक्ष एवं सेन्ट्रल कोपरेटिव बैंक आरा के पूर्व निदेशक शिव कुमार सिंह ने सरकार की तीस प्रतिशत की कटौती नीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि किसानों की धान नहीं खरीदने के पीछे भोजपुर में पैदावार की समीक्षा नहीं करना है। पिछले साल की तुलना में इस बाद धान की पैदावार यहां काफी अच्छी हुई है। ऐसे में धान अधिप्राप्ति के लक्ष्य को गत वर्ष की तुलना में और अधिक बढ़ाना चाहिए था जबकि तीस प्रतिशत की कटौती ही करके पैक्सों के सामने परेशानी खड़ी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी आश्चर्य की बात तो यह है कि धान खरीद के लक्ष्य में कटौती करने के सवाल पर जिले का कोई भी प्रमुख नेता आगे आकर सवाल नहीं उठा रहा है। यही कारण है कि पैक्सों और किसानों की भारी परेशानी के बावजूद सरकार और कृषि विभाग चुप्पी साधे हुए है।उन्होंने कहा कि किसान धान की खरीद नहीं किये जाने पर पैक्सों को दोषी ठहरा रहे हैं, जबकि इसके लिए सरकार की तीस प्रतिशत की कटौती नीति जिम्मेदार हैं। पैक्स के विरुद्ध किसानों की शिकायत कहीं से न्याय संगत नहीं है। उन्होंने सरकार और कृषि मंत्री से धान अधिप्राप्ति के लक्ष्य में की गई तीस प्रतिशत की कटौती के निर्णय को रद्द करने और पिछले साल के धान खरीद के लक्ष्य की तुलना में इस बार के लक्ष्य में वृद्धि करने की मांग की है।


