
शाहाबाद ब्यूरो
प्रशांत किशोर आज बाँकीपुर में दस हजार नौकरियां देने का वादा कर रहे हैं, प्रशांत किशोर बाँकीपुर में दस हजार नौकरियां देंगे या नहीं यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन पीके जिस सोंच के तहत बाँकीपुर में दस हजार नौकरी देने की बात कर रहे हैं, उस सोंच को आज से कई दशक पहले पूर्व सांसद आरके सिन्हा और भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने धरातल पर उतार कर दिखा दिया है और 38,000 से अधिक बिहारी युवाओं और 2 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और नियमित आय से जोड़कर सीधे तौर पर उनकी आर्थिक उन्नति एवं समृद्धि की राह आसान कर दी है। पूर्व सांसद आरके सिन्हा एवं राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा के बिहारी युवाओं और महिलाओं को नौकरी और रोजगार देने का सिलसिला लगातार जारी है। प्रशांत किशोर बाँकीपुर में दस हजार नौकरियां देने का वादा कर बाँकीपुर के युवाओं को नौकरी दें या नहीं दें लेकिन आरके सिन्हा और ऋतुराज सिन्हा ने हजारों लाखों बिहारी युवाओं और महिलाओं को नौकरी देकर उनके सपनों को ऊँची उड़ान जरूर दे दी है। आरके सिन्हा और ऋतुराज सिन्हा ने उन घरों में खुशियों के दीपक जलाये हैं जिन घरों में गरीबी की वजह से सदियों से अंधेरा छाया हुआ था। आज आरके सिन्हा और ऋतुराज सिन्हा की वजह से लाखों घरों में खुशियों के दीपक जल रहे हैं और करोड़ों लोगों के चेहरे पर मुस्कान दिखती है। प्रशांत किशोर का बाँकीपुर में दस हजार नौकरी देने का वादा सच साबित होगा या डपोरशंखी यह तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन भाजपा के संस्थापक सदस्य और पूर्व सांसद रवीन्द्र किशोर सिन्हा द्वारा स्थापित एवं भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा द्वारा संचालित एसआईएस ग्रुप ने पीएफ रिकॉर्ड के अनुसार पिछले माह तीन लाख 44 हजार से अधिक कर्मचारियों को वेतन दिया और उनका पीएफ पटना स्थित रीजनल पीएफ ऑफिस में जमा किया।इनमे से 38,000 से अधिक बिहार के युवा हैं जो आज एसआईएस के माध्यम से सीधे तौर पर नौकरी और रोजगार से जुड़े हैं।अकेले पटना जिले में लगभग 8,200 लोग स्थायी रूप से एसआईएस के साथ जुड़ कर कार्य कर रहे हैं।

ACFL (एसीएफएल) से लाखों महिलाओं का सपना हो रहा साकार, स्वरोजगार और आर्थिक स्वावलम्बन के क्षेत्र में महिलाओं के पँख को मिली नई उड़ान —
भाजपा के संस्थापक सदस्य एवं पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा एवं भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा द्वारा संचालित एसीएफएल भी एक उपक्रम है जिसका उद्देश्य बिहार की महिलाओं को स्वरोजगार एवं आर्थिक स्वावलम्बन से जोड़ना है। ये उनको जवाब है जो एसआईएस पर पलायन का प्रश्न उठाते हैं।
ACFL का मॉडल जीविका से अलग है। जीविका में जहां समूह बनाने के बाद स्वरोजगार के लिए सहायता प्रदान की जाती है वहीं एसीएफएल से कोई भी महिला सीधे जुड़ सकती है और उन्हें इसके लिए किसी समूह में कार्य करना जरुरी नहीं है।आरबीआई के नियामकीय ढांचे के अंतर्गत काम करने वाली ACFL से आज दो लाख से अधिक बिहारी महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं अपने घर और गांव से ही किराना दुकान, सिलाई- कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, पशुपालन सहित अनेक छोटे व्यवसाय चला रही हैं और अपने परिवार की आय बढ़ा रही हैं। ACFL से जुड़कर कई बिहारी महिलाएं तो 15,000-35,000 तक प्रति माह आय अर्जित कर रही हैं।
जो पीके आज बाँकीपुर में करने की बात कर रहे हैं उसे पूर्व सांसद आरके सिन्हा और ऋतुराज सिन्हा ने दशकों पहले जमीन पर उतरना शुरू कर दिया था।
फर्क सिर्फ इतना है कि –
भाजपा के संस्थापक सदस्य और पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा ने मार्केटिंग कम की, काम ज्यादा किया।
राजनैतिक लाभ के लिए इसे भंजाया नहीं।

