हिन्दू वैवाहिक कार्यक्रमों में बहु बेटियों का नचनिया कर्म

आलेख
  • समता कुमार (सुनील)

आज कल बेटे की शादी कर बहू लाई जा रही है या नचनियाँ/डांसर ..??
इन दिनों हिन्दू परिवार का नैतिक पतन रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। बारात में दुल्हन बिना दुपट्टे/आँचल का, सुरसा सा मुँह खोले मलाइका और मल्लिका सहरावत सा कमर लचकाती स्टेप देती जो नाचना शुरू कर रही है, तब दूल्हा उसके कमर में हाथ डाल कर नाचने से बाज नही आ रहा है। बजाप्ते दुल्हन का हाथ पकड़ स्टेज पर चढ़ा रहा है। बराती-सराती मजे ले रहे हैं या कुछ वरिष्ठ जन शर्म से मैदान छोड़ दे रहे हैं..!!
कई वैवाहिक वीडियो तो अपने सनातन को शर्मसार करते हुए सास को भी नाचते हुए दामाद का आगवानी करते हुए मिला है। सास का नृत्य के पद क्रम भी किसी चालू डांसर से कम नहीं होता..!!
आज आधुनिकता के नाम पर हमारा समाज कितना विकृत होता जा रहा है..?? विवाह जैसे संस्कार की धज्जी उड़ रही है…. सात फेरे, सप्तपदी, कन्यादान जैसे महत्त्वपूर्ण संस्कारक्षम कार्यक्रम को भूल आज सिर्फ बनाव-सिंगार, सबके समक्ष नचनियाँ बन दैहिक प्रदर्शन करना ही उद्देश्य रह गया है..!!
कुछ वर्षों पूर्व विवाह में सट्टे पर नचनियाँ आती थी, लेकिन अब उन नचनियों का वह काम घर की बहू बेटियाँ बड़ी ही शौक से करने लगी है..!! इस कर्म-कांड में घर की स्त्रियों के बराबर का दोषी अपने को सभ्य और प्रगतिशील कहलाने वाल पुरुष समाज भी है। इसका दुष्परिणाम परिवार को केवल और केवल असुरक्षित ही करेगा..!!
यह नचनिया कर्म पिछले दो-तीन साल से बहुत तेजी से शुरू हुआ है, जो इस साल बहुत बढ़ गया है..
जरुरत हमारे सनातन समाज के प्रबुद्ध एवं सजग पुरुष समाज को इस नचनिया बहु पर ब्रेक लगाने के प्रयास प्रारंभ करने के लिए आगे आने का.. परिवार सुरक्षित हो… बच्चे सनातनी बनें.. प्रतिष्ठित बनें… तभी अपनी अस्मिता को यह राष्ट्र सुरक्षित रख पायेगा।
✍ समता कुमार (सुनील)

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