पटना नगर निगम चुनाव में कुसुमलता वर्मा के समर्थन में आ सकते हैं कई उम्मीदवार

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पटनाः पटना नगर निगम चुनाव में कुसुमलता वर्मा की शालिनता उनके लिए वरदान साबित हो रहा है। साथ ही पहली बार नगर की सरकार के लिए उन्होंने दस्तक दी है तो इस वजह से उनको कोई विरोध भी नहीं हो रहा है। पटना नगर निगम में पिछले दो टर्म से वैश्य समाज से ताल्लुकात रखने वाली सीता साहू काबिज हैं। वहीं इस बार महिला सीट पर लगभग 6 लाख कायस्थ मतों में विभाजन का अंदेशा दिख रहा है। अन्यथा कायस्थ उम्मीदवार ही पटना का मेयर चुना जा सकता है। अगर हम कायस्थ उम्मीदवारों की बात करें तो दो प्रत्याशी कुसुमलता वर्मा और माला सिन्हा दोनों प्रबल नाम अपने तरीके से दावेदारी ठोंक रही हैं।

सुजीत वर्मा

एक तरफ माला सिन्हा पहले से ही वार्ड पार्षद हैं वहीं कुसुमलता वर्मा जी पहली बार मैदान में हैं। हालांकि कुसुमलता वर्मा की अगर बात करें तो इनको कायस्थ संगठनों की तरफ से एक अंदरुनी सर्वे तथा उनको चुनाव लड़ने के लिए कहा गया तब वो मैदान में आयी हैं। इनके पति सुजीत वर्मा शुरुआती दौर से ही इंश्योरेंस विभाग में प्रबंधक से आज भले ही अवकाश प्राप्त हुए हैं इस साल, मगर इतना तो कहा ही जा सकता है कि सामाजिक संगठनों में इनकी भूमिका अग्रणी रही है। सुजीत वर्मा की तत्परता की वजह से इनको कायस्थ समाज के कई पदों की जिम्मेदारी दी गई, जिसको निष्ठा के साथ इन्होंने अपना दायित्व निभाया। सूत्रों की मानें तो कायस्थ समाज के संगठनों की सहमति के आधार पर ही सुजीत वर्मा ने अपनी पत्नी कुसुमलता वर्मा को मैदान में उतारे हैं। इस तरीके से देखी जाए तो कायस्थों का बड़ा वोट भले ही कुछ बोल नहीं रहा है, लेकिन जब कुसुमलता वर्मा के नाम पर सहमति जताया है तो निश्चिततौर पर इसका फायदा कुसुमलता वर्मा को मिलेगा। इसके अलावे श्रीमती वर्मा के पक्ष में अन्य जातियों का समर्थन भी मिलेगा क्योंकि इनके पति प्रारंभिक दौर से ही फिल्ड वर्क में रहे कैं किसी से कोई विवाद नहीं रहा है।

कायस्थ समाज के अन्य प्रत्याशियों की बात करें तो भले ही कुछ बोल नहीं रही हों मगर कई प्रत्याशी भी अंदरुनी रुप से कुसुमलता वर्मा के पक्ष में आ सकते हैं। इस पूरे प्रकरण पर गौर करें तो इससे स्पष्ट हो जाता है कि कुसुमलता वर्मा की नीति और नियति पर किसी तरह का संदेश नहीं किया जा सकता है। रही बात राजनीति है कल क्या होगा कहा नहीं जा सकता है। परंतु इतना तो कहा ही जा सकता है कि जो खबरें छनकर सामने आयी हैं उसी आधार पर ही इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

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