जनता दे रही टैक्स, नेता कर रहे ऐश

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मुफ़्त और फ्री वाली शब्दावली देश के लोकतंत्र के चरित्र और उसकी गरिमा को शर्मसार कर रही है। इसलिए इस शब्द को प्रयोग नहीं करना चाहिए। मुफ़्त शब्द का इस्तेमाल नागरिकों का अपमान है।अनाज और वैक्सीन देना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। सरकार को अपनी जिम्मेदारी को खैरात में नहीं तब्दील करने चाहिए।

–        मनोज कुमार श्रीवास्तव

चाहे कोई भी सरकार हो किसी भी नागरिक को मुफ्त में कुछ भी नहीं देती है और न दे रही है।देश के नागरिक एक-एक चीज के लिए पैसे दिये हैं और अभी भी देते आ रहे हैं।यहां तक कि संसद भवन के पास को सेंट्रल विस्टा (central vista) बन रहा है उसमें भी गरीबों का पैसा लग रहा है।जब जनता टैक्स दे रही है तो जनता को दिये जा रहे लाभ में फ्री और मुफ्त शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

        मुफ़्त और फ्री वाली शब्दावली देश के लोकतंत्र के चरित्र और उसकी गरिमा को शर्मसार कर रही है। इसलिए इस शब्द को प्रयोग नहीं करना चाहिए। मुफ़्त शब्द का इस्तेमाल नागरिकों का अपमान है।अनाज और वैक्सीन देना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। सरकार को अपनी जिम्मेदारी को खैरात में नहीं तब्दील करने चाहिए। सरकार गरीबों के नाम पर शासन करती है।पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने दावा किया था कि उन्होंने समृद्ध वर्ग को उसकी जगह पहुंचा दिया है शायद उन्हों ऐसा किया लेकिन उससे गरीबों को खान मदद मिली।इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाने की कसमें खाई ।बैंको का राष्ट्रीयकरण किया गया।

     आजादी के 75 साल में वे वह गरिमा नहीं देख सके जो वे चाहते हैं।एक के एक सरकारें आती रही,गरीबों,न्याय और समानता के नाम पर  अरबों रुपये का टैक्स वसूल गया पर उनकी जिंदगी बदलने में नाकाम रही।वे आज भी अवैध झुग्गियों में रहते हैं।जो मानसून में टूट जाती है। गरीबों को अपने लिए खुद कोशिश करनी पड़ती है।वे अब भी ऐसा ही कर रहे हैं।जबकि उनके नाम पर राजनीतिक दल वोट जीतती है।न्यायपालिकाएं उन्हें सजा देती है, झुग्गी मालिक उन्हें धोखा देते हैं।व्यापक समाज ने उन्हें उनके भरोसे छोड़ दिया है।

      मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि आम जनता से खाने पर भी टैक्स लिया जा रहा है और वहीं 5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया जा रहा है।पिछले कुछ दिनों से जनता को मुफ्त में मिलने वाली सुविधाओं का विरोध किया जा रहा है।कहा जा रहा है कि अगर सरकारें फ्री में सुविधायें देंगी तो कंगाल हो जाएगी।देश के सबसे गरीब किसान और मजदूर जो साल में 100 दिन दिहाड़ी करते थे उसमें भी कटौती कर दी है।

       केन्द्र सरकार जितना भी टैक्स एकत्र करती है उसमें से एक हिस्सा राज्य सरकारों को देती है।अब इसमें भी कटौती कर दी गई है।2014 में केंद्र सरकार का 20 लाख करोड़ का बजट होता था आज 40 लाख करोड़ का बजट है तो केन्द्र सरकार का सारा रुपया कहाँ गया। अरबपतियों, दोस्तों के लगभग 10 लाख करोड़ रुपये के कर्जे माफ कर दिये गये।यदि ये कर्ज माफ नहीं किये जाते तो इनको खाने-पीने की चीजों पर टैक्स लगाने की जरूरत नहीं होती।पेंशन बन्द करने की जरूरत नहीं होती।

      आप के सांसद राघव चड्ढा ने रावण के साथ महंगाई की तुलना करते हुए कहा है कि जिस तरह रावण के 10 सिर थे उसी तरह देश की महंगाई के भी 7 सिर हैं।पहला ऊर्जा पर टैक्स, दूसरा सर्विस इन्फ्लेशन जो नजर नहीं आती लेकिन महसूस होती है, तीसरा जीएसटी का बोझ,चौथा लागत बढ़ाने वाली महंगाई, पांचवा बढ़ती महंगाई घटती कमाई,छठा गिरता हुआ रुपया और सातवां है कार्पोरेट और सरकार की सांठगांठ।

       देश में घरेलू व अन्य जरूरी वस्तुओं की लगातार कीमतों ने गरीब और आम आदमी की कमर तोड़ दी है।पहले से कर्ज में डूब किसान और कर्ज में डूब गया है लेकिन सरकार को केवल अपने कारपोरेट लोगों की चिंता है।केंद्र सरकार ने 2016 से 2022 तक ईंधन पर लगाये गये उत्पाद शुल्क के माध्यम से 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक कमाए हैं और पिछले एक साल में ईंधन की कीमतें 75 से अधिक बार बढ़ाई गई है।अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से कहा है कि टैक्स का पैसा खान है, मुफ्त की योजना का केन्द्र क्यों कर रहा विरोध, लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।

    करोड़पति नेता टैक्स देने के लिए गरीब हैं।कई राज्यों से मामले सामने आए हैं कि विधायक और मंत्री इनकम टैक्स भरने में सक्षम नहीं है।इसका तोड़ भी मंत्रियों ने निकाल लिया है कि उनका टैक्स सरकारी पैसे से भरा जाए।हालांकि सबसे पहले पंजाब केतत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मार्च 2018 में ही इस प्रथा को बंद कर दिया था।टैक्स भरने में खुद को सक्षम न पाने वाले कुछ नेताओं ने अपनी आय कितनी बताई है:-मध्य्प्रदेश के शिवराज सिंह चौहान 2006 में अपनी सम्पति 1 करोड़ बताई थी जो 2013 में बढ़कर 6 करोड़ हो गई।कमलनाथ जो कांग्रेस के कद्दावर नेता 2018 के विधानसभा चुनाव में अपनी सम्पति 206 करोड़ से ज्यादा बताया, बीजेपी नेता डॉ0 रमन सिंह 2013 में अपनी सम्पति 5 करोड़ बताई थी,भूपेश बघेल कांग्रेस के बड़े नेता छत्तीसगढ़ चुनाव मे  23 करोड़ बताई थी,2017 में बीजेपी नेता जयराम ठाकुर 3 करोड़ ,कांग्रेस के हरीश रावत2014 में 6 करोड़,बीजेपी नेता त्रिवेन्द्र सिंह रावत 2017 में 1 करोड़,हरियाणा के भूपेंद्र सिंह हुड्डा 2014 में 3 करोड़ बताई थी इन लोगों का टैक्स मुख्यमंत्री होने के कारण जनता के रुपये से भरा गया

         लोकतंत्र में राजनेताओं को जितनी आजादी है उतना किसी को नहीं।अब तो समझ मे आ हीं गया कि करोडों की अकूत सम्पति के बावजूद टैक्स जनता द्वारा भरी गई।दिनरात हाड़तोड़ मेहनत कर भले अपने परिवार को देखभाल अच्छे तरीके,से,बच्चों को अच्छी तामील न दे लेकिन उन अमीर नेताओं का टैक्स जरूर भरते हैं।इससे अच्छा क्या हो सकता है।भूखे गरीब की गाढ़ी कमाई से नेताओं की टैक्स भरना कितना मुलाजिम है लोकतंत्र में।

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