रामचरितमानस- जानिए किस इंसान से किस तरह की बात नहीं करनी चाहिए?

धर्म ज्योतिष
  • आचार्य मोहित पांडेय
    श्रीरामचरितमानस के दो चौपाइयों में भगवान श्री राम हमें बताते है की हमे किस तरह के इंसान से किस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए। आइए जानते है कौन है वो लोग और कौनसी है वो बातें-

सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति। सहज कृपन सन सुंदर नीति॥

  • ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी सन बिरति बखानी॥
    क्रोधिहि सम कामिहि हरिकथा। ऊसर बीज बएँ फल जथा॥

भावार्थ:- मूर्ख से विनय, कुटिल के साथ प्रीति, स्वाभाविक ही कंजूस से सुंदर नीति (उदारता का उपदेश),॥ ममता में फँसे हुए मनुष्य से ज्ञान की कथा, अत्यंत लोभी से वैराग्य का वर्णन, क्रोधी से शम (शांति) की बात और कामी से भगवान्‌ की कथा, इनका वैसा ही फल होता है जैसा ऊसर में बीज बोने से होता है (अर्थात्‌ ऊसर में बीज बोने की भाँति यह सब व्यर्थ जाता है)॥
मूर्ख यानी जड़ बुद्धि वाले व्यक्ति से न करें प्रार्थना श्रीराम कहते हैं कि किसी मूर्ख से विनय की बात नहीं करनी चाहिए। कोई भी मूर्ख व्यक्ति दूसरों की प्रार्थना को समझता नहीं है, क्योंकि वह जड़ बुद्धि होता है। मूर्ख लोगों को डराकर ही उनसे काम करवाया जा सकता है।

कुटिल यानी बेईमान के साथ न करें प्रेम से बात
श्रीराम कहते हैं कि जो व्यक्ति कुटिल स्वभाव वाला होता है, उससे प्रेम पूर्वक बात नहीं करना चाहिए। कुटिल व्यक्ति प्रेम के लायक नहीं होते हैं। ऐसे लोग सदैव दूसरों को कष्ट देने का ही प्रयास करते हैं। ये लोग भरोसेमंद नहीं होते हैं। अपने स्वार्थ के लिए दूसरों को संकट में डाल सकते हैं। अत: कुटिल व्यक्ति से प्रेम पूर्वक बात नहीं करनी चाहिए।

कंजूस से न करें दान की बात जो लोग स्वभाव से ही कंजूस हैं, धन के लालची हैं, उनसे उदारता की, किसी की मदद करने की, दान करने की बात नहीं करना चाहिए। कंजूस व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में धन का दान नहीं कर सकता है। कंजूस से ऐसी बात करने पर हमारा ही समय व्यर्थ होगा।

ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी सन बिरति बखानी।।
क्रोधिहि सम कामिहि हरिकथा। ऊसर बीज बएँ फल जथा।।

ममता में फंसे हुए व्यक्ति से न करें ज्ञान की बात
श्रीराम कहते हैं- ममता रत सन ग्यान कहानी। यानी जो लोग ममता में फंसे हुए हैं, उनसे ज्ञान की बात नहीं करना चाहिए। ममता के कारण व्यक्ति सही-गलत में भेद नहीं समझ पाता है।

अति लोभी से वैराग्य की बात अति लोभी सन बिरति बखानी। यानी जो लोग बहुत अधिक लोभी हैं, उनका पूरा मोह धन में ही लगा रहता है। ऐसे लोग कभी भी वैरागी नहीं हो सकते हैं। सदैव धन के लोभ में फंसे रहते हैं। इनकी सोच धन से आगे बढ़ ही नहीं पाती है। अत: ऐसे लोगों से वैराग्य यानी धन का मोह छोड़ने की बात नहीं करना चाहिए।

क्रोधी से शांति की बात जो व्यक्ति गुस्से में है, उससे शांति की बात करना व्यर्थ है। क्रोध के आवेश में व्यक्ति सब कुछ भूल जाता है। ऐसे समय में वह तुरंत शांत नहीं हो सकता है। जब तक क्रोध रहता है, व्यक्ति शांति से बात नहीं कर पाता है। क्रोध के आवेश में व्यक्ति अच्छी-बुरी बातों में भेद नहीं कर पाता है।

कामी से भगवान की बात जो व्यक्ति कामी है यानी जिसकी भावनाएं वासना से भरी हुई हैं, उससे भगवान की बात करना व्यर्थ है। कामी व्यक्ति को हर जगह सिर्फ काम वासना ही दिखाई देती है। अति कामी व्यक्ति रिश्तों की और उम्र की मर्यादा को भी भूला देते हैं। अत: ऐसे लोगों से भगवान की बात नहीं करनी चाहिए।

-आचार्य मोहित पांडेय

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