सहज आंखे…
पूजा भूषण झा, वैशाली, बिहार मुझको आंखें तेरी सहज लगेजब उन आंखों में झांक लिया,श्लाघ्य थे वो हर शब्द तेरेजिसको मैंने महसूस किया। पुलकित कर देती हैं कुछ शब्दजैसे परिष्कार हुआ हो मन का,अलौकिक सी लगते है वह पलरोम -रोम खिल उठे हो तन का। स्वयं को जब भी स्पर्श हूं कीजैसे क्षितिज पर बैठी […]
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