डुमरांव विधानसभा क्षेत्र में इस बार का चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राजनीति की दिशा बदलने का संकेत देता दिख रहा है। मौजूदा रुझान चुनाव परिणामों में बदलते हुए, यह साफ होगा कि जनता अब जाति नहीं, विकास पर वोट दे रही है और इस परिवर्तन की अगुवाई कर रहे हैं जदयू के प्रत्याशी राहुल कुमार सिंह।
बक्सर/डुमरांवः 21 अक्टूबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच डुमरांव सीट से एनडीए के जदयू प्रत्याशी राहुल कुमार सिंह चर्चा के केंद्र में हैं। पूर्व प्रशासनिक अधिकारी से नेता बने राहुल कुमार सिंह ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास और जनसरोकारों को चुनावी एजेंडा बनाया है, जिसके चलते वे जनता के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

राहुल कुमार सिंह ने जदयू की ओर से टिकट मिलने के बाद से ही क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं को रोजगार जैसे मुद्दों पर उनका साफ दृष्टिकोण लोगों को आकर्षित कर रहा है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी मोहल्लों तक, वे लगातार जनसभाएं कर रहे हैं और लोगों की समस्याएं सुनकर ठोस समाधान का आश्वासन दे रहे हैं।
पूर्व अधिकारी से जनप्रतिनिधित्व की ओर
राहुल कुमार सिंह का प्रशासनिक अनुभव उन्हें भीड़ से अलग बनाता है। वे पहले राज्य सरकार में एक वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्यरत रह चुके हैं, और उनकी छवि एक ईमानदार व परिणाम-केन्द्रित अफसर की रही है। सेवा काल में उन्होंने जिस कुशलता से योजनाओं को धरातल पर उतारा, वही रवैया अब वे राजनीतिक क्षेत्र में भी ला रहे हैं।

जनता के मुद्दों पर खुलकर बात
अपनी रैलियों और सभाओं में राहुल कुमार सिंह जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति से हटकर विकास को मुख्य एजेंडा बनाने की बात कर रहे हैं। वे कहते हैं- “जनता अब वादों से नहीं, काम से बदलाव चाहती है। डुमरांव को विकास के हर पैमाने पर आगे लाना मेरा संकल्प है।”
जनता में उत्साह, विरोधियों में चिंता
डुमरांव की गलियों में राहुल कुमार सिंह के लिए समर्थन की लहर साफ दिखाई देती है। युवाओं, महिलाओं और बुज़ुर्गों के बीच उनके लिए साफ झुकाव देखने को मिल रहा है। वहीं, उनके बढ़ते जनाधार से विपक्षी खेमे में चिंता की लहर है। कांग्रेस और राजद के प्रत्याशी जहाँ जातीय समीकरण साधने में जुटे हैं, वहीं राहुल कुमार सिंह ने विकास और पारदर्शिता को चुनावी हथियार बनाया है।
रिपोर्ट- ब्यूरो

