- 12 जनवरी को रविन्द्र भवन में आयोजित होगा आध्यात्मिकता दिवस
पटना. बिहार के लोगों में धार्मिक चेतना और सनातन के प्रति आस्था प्रबल हो रही है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणबीर नंदन ने कहा कि नए साल के पहले ही दिन बिहार की धरती पर यह दृश्य देखने को मिला। अंग्रेजी नववर्ष की सुबह जहां पहले पिकनिक स्पॉट और पर्यटन स्थलों पर भीड़ दिखती थी, वहीं इस बार प्रदेश के लगभग हर छोटे-बड़े मंदिर और देवालय में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। खास बात यह रही कि इस भीड़ में युवाओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक नजर आई। लंबी कतारों में खड़े युवा हाथों में पूजा की थाली लिए नए साल की शुरुआत मंदिरों में देव दर्शन से करते दिखे।
प्रो. नंदन के अनुसार 18 सितंबर को धार्मिक न्यास पर्षद द्वारा आयोजित समागम और सम्मेलन का सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। इसका असर न केवल सामाजिक माहौल में, बल्कि जनमानस की सोच और प्राथमिकताओं में भी दिखाई दे रहा है, जो एक जनवरी की भीड़ से साफ झलकता है।
प्रो नंदन ने कहा कि एक जनवरी को बिहार के सभी 38 जिलों में यही तस्वीर रही। बैकठपुर शिव मंदिर, मां पटनदेवी,हनुमान मंदिर,पटना जंक्शन, दरभंगा हाउस काली मंदिर से लेकर सिद्धेश्वरी काली मंदिर तक,गर्दनीबाग ठाकुरबाड़ी,हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही सुबह से ही बनी रही। कई मंदिरों में तो हालात ऐसे रहे कि प्रबंधन को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी। अंग्रेजी नववर्ष होने के बावजूद पूजा-पाठ और दर्शन के प्रति लोगों की यह आस्था बताती है कि बिहार में धार्मिक चेतना पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। अब लोग इसे आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक शुरुआत के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।
प्रो नंदन ने मंदिरों में उमड़ी इस भारी भीड़ पर मठ-मंदिरों और स्थानीय समितियों की व्यवस्थाओं की खुले दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में जिस तरह से शांति, अनुशासन और सुव्यवस्था के साथ दर्शन संपन्न हुए, वह अपने आप में अद्भुत है।
प्रो. नंदन ने यह भी उल्लेख किया कि विवेकानंद जयंती के अवसर पर 12 जनवरी को बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद स्थानीय रविन्द्र भवन में आध्यात्मिकता दिवस मना रहा है।
आध्यात्मिकता दिवस के तहत स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण पर आधारित एक निबंध प्रतियोगिता पटना के रवींद्र भवन में आयोजित की जाएगी। इस प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार 25 हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार 15 हजार रुपये और तृतीय पुरस्कार 11 हजार रुपये रखा गया है। इसके अलावा दस सांत्वना पुरस्कार भी दिए जाएंगे। इस प्रतियोगिता का संयोजन बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के सचिव एवं महावीर मंदिर के सचिव सायन कुणाल को सौंपा गया है।
इस अवसर पर उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि स्वामी विवेकानंद द्वारा भारत के गौरव को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए इस दिवस को पूरे सम्मान और भाव से मनाया जाए।
प्रो. नंदन ने नए साल के पहले दिन उमड़ी भीड़ को सनातन धर्म के प्रति बढ़ती आस्था और जागरूकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म का दर्शन सर्वव्यापी है और सामाजिक समरसता से भरपूर है, जिसमें सभी धर्मों और मतों के प्रति आदर का भाव निहित है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार जताते हुए कहा कि अयोध्या में रामलला मंदिर, माता सीता की जन्मस्थली पुनौराधाम, काशी विश्वनाथ, उज्जैन महाकाल सहित देश और बिहार के अनेक मंदिरों का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण कर सनातन धर्म के वैज्ञानिक और सामाजिक पक्ष को जनता के सामने मजबूती से रखा गया है।
धार्मिक न्यास पर्षद का लक्ष्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि बिहार के मंदिर और मठ शिक्षा, चिकित्सा, शारीरिक सौष्ठव और सामाजिक सुधार के केंद्र के रूप में विकसित हों। प्रो. नंदन ने बताया कि प्रत्येक पूर्णिमा को सत्यनारायण भगवान के पूजन और प्रत्येक अमावस्या को मां भगवती के पूजन के लिए घर-घर लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। उनका मानना है कि आने वाले समय में आध्यात्मिक गतिविधियां युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देंगी और वे अपने समय और ऊर्जा का उपयोग समाज और राष्ट्र निर्माण में करेंगे।

