पटना: बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के सदस्य एवं पूर्व विधान पार्षद डॉ. रणबीर नंदन ने राज्य के मंदिरों और मठों के उत्थान के लिए कई अहम और दूरदर्शी कदम उठाए हैं। उनके प्रयासों से न केवल धार्मिक संस्थानों के प्रशासनिक ढांचे में सुधार आया है, बल्कि युवा वर्ग के बीच भी धार्मिक-सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा मिली है।
डॉ. रणबीर नंदन ने पर्षद के माध्यम से मंदिर-मठों की संपत्तियों के संरक्षण, पारदर्शी प्रबंधन और आय के समुचित उपयोग पर विशेष बल दिया। उनके नेतृत्व में कई प्राचीन मंदिरों और मठों की स्थिति की समीक्षा की गई तथा आवश्यक सुधारों के लिए योजनाबद्ध पहल शुरू की गई। पर्षद के अधिकारियों के अनुसार, इन कदमों से धार्मिक न्यासों के संचालन में जवाबदेही बढ़ी है और संसाधनों का उपयोग जनहित में हो रहा है।
युवाओं को जोड़ने पर विशेष जोर
डॉ. नंदन की पहचान ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में रही है, जिन्होंने युवाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया। उन्होंने मंदिर–मठों को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखकर उन्हें सामाजिक संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और नैतिक शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसी सोच के तहत युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए संवाद कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों को प्रोत्साहन मिला।
पारदर्शिता और सुधार की पहल
पूर्व विधान पार्षद के रूप में अपने अनुभव का लाभ उठाते हुए डॉ. रणबीर नंदन ने धार्मिक न्यासों के प्रशासन में पारदर्शिता लाने की दिशा में ठोस पहल की। मंदिर-मठों से जुड़े अभिलेखों के अद्यतन, आय-व्यय की स्पष्ट व्यवस्था और अनियमितताओं पर नियंत्रण जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई। इससे आम श्रद्धालुओं का भरोसा भी मजबूत हुआ है।
जनसमर्थन और लोकप्रियता
धार्मिक, सामाजिक और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका के कारण डॉ. रणबीर नंदन युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। उन्हें एक ऐसे नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जा रहा है जो परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाकर धार्मिक संस्थानों को समाजोपयोगी बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।
कुल मिलाकर, बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद में डॉ. रणबीर नंदन द्वारा उठाए गए कदम मंदिर-मठों के उत्थान के साथ-साथ सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

