साहित्य हमें संवेदनशील बनाता है, साहित्य बिहार लिटरेचर फेस्टिवल का किया गया आयोजन

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पटना : जहां  भावना है, संवेदना है, कविता-कहानी, रचना वहीं से शुरू हो जाती है। साहित्य मनुष्य को संवेदनशील बनाता है, हमारी मन की संकीर्णता दूर करता है। जिन्दगी के द्वंद्वों की सृजनात्मक अभिव्यक्ति ही साहित्य है। हम संकेतों से इंगित करता है, जिन्दगी के विरोधाभास को, संघर्षो को, द्वंद्वों को और मनुष्य की भावनाओं को। जिंदगी का प्रतिबिंब साहित्य में देखा जा सकता है,  साहित्य को केवल एक दृष्टिकोण से नहीं लिया जा सकता है। ये बातें द कुकबुक, पाटलिपुत्र में साहित्य बिहार, लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजन के दौरान साहित्यकारों ने कही। कविता-कहानी, शेर-ओ-शायरी, आलेख, छंद और व्यक्तव्यों के जरिए सभी वक्ताओं ने साहित्य बिहार में समा बांध दिया।

कार्यक्रम का संयोजन मोटिवेशनल स्पीकर और फैशन डिजाइनर नीतीश चंद्रा जी ने किया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजन से मैं बेहद उत्साहित हूँ क्योकि अपने जॉनर से इतर साहित्य के लिए कुछ करना चाह रहा और लोगो का भर भर के प्यार मिला।  ये बस एक लॉन्च पैड इवेंट है ताकि मैं इसकी बारीकियां समझ सकूँ और भविष्य में इसे वैसे भव्य तरीके से ऑर्गेनाइज कर सकूँ। जैसे मैं अपने दूसरे इवेंट्स करता आया हूँ। क्योकि साहित्य और पुस्तक हमारे समाज का स्तम्भ है और इसे संजोए रखना काफी जरुरी है।

कार्यक्रम में शिक्षाविद ममता मेहरोत्रा, विशेष सचिव सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड दिलीप कुमार, बिहार पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय सिंह, मशहूर सिंगर नीतू नवगीत, रितेश चौधरीदिव्या सिंह, प्रीति भलोटिआ, एएन  कॉलेज की प्रोफेसर भावना शेखर, जेडी वीमेंस कॉलेज की एचओडी वीणा अमृत, डॉक्टर पल्लवी विश्वास,शायर शमीम अख्तर, समीर परिमल, बिहार के व्यंजन के लेखक रविशंकर उपाध्याय, कमल किशोर वर्मा , संगीता वर्मा , डॉक्टर प्रीति बाला, पटना यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र नेता सह लेखक अंशुमान, कुमार रजत, आर चंद्रा,इरशाद शिबू ,काव्यापीडिया के अंशुमान ,नेत्रोडेम स्कूल की नौवीं क्लास की छात्रा सह लेखक आद्या चौधरी सही कई गणमान्य उपस्थित थे।

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