VKSU के सम्बद्ध कॉलेजो में शिक्षकों के बकाए अनुदान वितरण पर कार्रवाई क्यों नही करते केके पाठक

देश

शाहाबाद ब्यूरो
बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक द्वारा शिक्षा में सुधार के लिए आदेश पर आदेश जारी किए जा रहे हैं और इसका सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगा है।अंगीभूत कॉलेजों और सम्बद्धता प्राप्त अनुदानित डिग्री कॉलेजों में शिक्षको की उपस्थिति ससमय विवि के माध्यम से शिक्षा विभाग को भेजी जा रही है।
बावजूद इसके शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालय के कुलपतियों से इस बात की जानकारी अभी तक नही मांगी है कि सम्बद्धता प्राप्त अनुदानित डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों एवं कर्मचारियों के राज्य सरकार के भेजे गए पैसे का भुगतान हुआ या नही।अनुदान का भुगतान हुआ तो कब तक का अनुदान बांटा गया।अगर कई सालों से शिक्षक एवं कर्मचारियों का अनुदान आज तक नही बंटा तो क्यों नही बंटा और उसका जिम्मेवार कौन है।उस पर क्या कार्रवाई होगी।
वीर कुंवर सिंह विवि के कई ऐसे अनुदानित सम्बद्ध डिग्री कॉलेज हैं जहां वर्षों से सरकार की भेजी गई राशि नही वितरित की जा सकी है।कॉलेजों में विवाद के नाम पर विवि अनुदान राशि को रोक कर ब्याज की बड़ी राशि हड़पने की साजिश रच रहा है।विवि अनुदान के पैसे का सूद कमाने के चक्कर मे कॉलेजो का विवाद खत्म कराकर अनुदान भेजने और शिक्षकों एवं कर्मियों के बीच अनुदान राशि बंटवाने में इसीलिए दिलचश्पी नही ले रहा है।विवि सम्बद्ध डिग्री कॉलेजो में अनुदान बंटवाने के लिए कभी सक्रिय ही नही रहा।स्थिति यह है कि इस विवि के कई कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2008-11 से लेकर आज तक का अनुदान बकाया है।
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक को वीर कुंवर सिंह विवि समेत राज्य के सभी विवि में राज्य सरकार के भेजे गए अनुदान की राशि को शिक्षक कर्मचारियों के बीच बंटवाने की प्रक्रिया को अपडेट करना चाहिए।
अंगीभूत कॉलेजों और वित्त अनुदानित सम्बद्ध डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मियों के वेतन भुगतान में काफी अंतर है।अंगीभूत कॉलेजों में जहां शिक्षक कर्मचारियों को प्रति महीने सरकारी वेतन मिलता है जबकि सम्बद्ध डिग्री कॉलेजों में आंतरिक स्रोत से प्रति महीने शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन दिए जाते है।यह वेतन महज सिर्फ कहने के लिए है और एक मनरेगा के मजदूर के तीस दिन के पारिश्रमिक से भी काफी कम है।
अपर मुख्य सचिव को इस दिशा में भी ठोस कार्रवाई करनी चाहिए कि सम्बद्ध डिग्री कॉलेजों में आंतरिक स्रोत की राशि को कैसे बढ़ाया जाए और शिक्षको एवं कर्मियों को आंतरिक स्रोत से प्रति माह सम्मानजनक वेतन कैसे दिया जाय।सरकार की भेजी जाने वाली अनुदान की राशि का वितरण समय पर कैसे वितरित कराई जाए।इस राशि के वितरण में देर होने पर किसकी जवाबदेही तय की जाय ताकि समय पर अनुदान वितरण नही कराने वाले जिम्मेवार लोगों पर कार्रवाई की जा सके।
अंगीभूत कॉलेजो की तरह कार्य करते हैं सम्बद्धताप्राप्त डिग्री कॉलेजों के शिक्षक-
वीर कुंवर सिंह विवि के सम्बद्धताप्राप्त डिग्री कॉलेजों के शिक्षक अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षकों से भी अधिक कार्य करते हैं।
सम्बद्ध डिग्री कॉलेजों में नामांकन के बाद नामांकन सत्यापन का कार्य शिक्षक करते हैं।छात्र छात्राओं की पढ़ाई कराने का कार्य शिक्षक करते हैं।विवि द्वारा आयोजित स्नातक के विभिन्न संकायों कला,विज्ञान एवं वाणिज्य के पार्ट वन,पार्ट टू और पार्ट थ्री की परीक्षाओं में बतौर वीक्षक शिक्षक ही वीक्षण कार्य करते हुए परीक्षाओं का कार्य पूरा करते हैं।परीक्षाओं के बाद उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार भी शिक्षक ही करते हैं।
बावजूद इसके अंगीभूत और सम्बद्ध डिग्री कॉलेजो के शिक्षकों के सरकारी वेतन भुगतान की अलग अलग प्रक्रियाओं की वजह से अनुदानित डिग्री कॉलेजों के शिक्षक पूरी जिम्मेवारी से अपना कार्य करने के बावजूद भी भूखे मर रहे हैं।उनकी सुध भी अपर मुख्य सचिव केके पाठक को लेना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *