राजनीति सत्ता पाने का नहीं,सेवा करने का माध्यम है

आलेख

  • मनोज कुमार श्रीवास्तव

किसी भी देश का नेतृत्व यदि सफल और दूरगामी सोंच वाले नेता के हाथों में है तो वह देश विश्व की कूटनीति और राजनीति में सफल होकर पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए आगे बढ़ता चला जाता है और एक दिन वह देश विश्व की पहली पंक्ति में खड़ा हो जाता है।ऐसा इसलिए होता है कि उस देश का नेता सम्पूर्ण विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा और विश्व की कूटनीति एवं राजनीति में वह नेता सफल हो गया।

     जिससे कि सम्बंधित देश की आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति होती है ठीक इसके विपरीत यदि किसी भी देश के नेतृत्व में तनिक भी विश्व स्तर के नेतृत्व शक्ति का अभाव है तो वह देश कितना ही बलवान क्यों न हो अपने नेता की अक्षमताओं के कारण विश्व स्तर की राजनीति में सफल कभी नहीं हो सकता।राजनीति का मुख्य उद्देश्य देशहित एवं जनहित पर आधारित होता है।

      परिवार की राजनीति किसी भी देश के लिए एक कैंसर बीमारी है जो देश को धीरे-धीरे खोखला कर एक दिन समाप्त कर देती है।आज किसी भी राजनीतिक पार्टी में योग्य व्यक्ति की कमी नहीं है लेकिन वह ऐसी पार्टियों में है कि वह आगे आ ही नहीं सकते।वंशवाद की राजनीति हावी होने के कारण योग्य व्यक्ति को अपनी राजनीतिक पार्टी में देश की सेवा का अवसर नहीं मिलता।

       भारत की राजनीति को पारिवारिक कैरियर के रूप में ढालने का खांका खींचा जा रहा है।यह चिंता का विषय है।आज देश की राजनीति को ट्रेनिंग स्कूल के रूप में ढालने का प्रयास किया जा रहा है।किसी भी चर्चित परिवार या वंश में जन्में हुए व्यक्ति को देश के ऊपर थोपने का प्रयास किया जा रहा है।देश एवं देश की जनता के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना गलत एवं अन्यायपूर्ण है।

         देश की प्रत्येक जनता को इस पर गम्भीरता पूर्वक विचार एवं आत्म मंथन करना होगा कि क्या सत्य है और क्या असत्य।क्योंकि यह देश के हरेक नागरिक के भविष्य की बात है।किसी भी नेता के नेतृत्व से फैला हुआ असन्तोष ही आंदोलन का मुख्य कारण बना है।

    राजनीति का चरित्र चित्रण, उसके नेतृत्व में प्रतिबिंबित होता है।कोरोना जैसे वैश्विक महामारी के समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्तमान भारत सरकार ने जिस प्रकार से गरीबों एवं असहायों की सहायता के लिए राजनीतिक दूर दृष्टि के साथ शासन एवं प्रशासन का कार्य किया है वह संस्थाओं के नेतृत्व का श्रेष्ठ उदाहरण है।

        विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले भारत जैसे देश में कोरोना के संकट से निपटते हुए गरीबों ,मजदूरों,किसानों,शोषितों एवं वंचितों के हितों की रक्षा करने से लेकर देश की आर्थिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलने तक का कार्य किसी भी चुनौती से कम नहीं है।

   संकट के ऐसे समय में प्रधानमंत्री ने देश के सभी राजनीतिक दलों को एक साथ जोड़ने का प्रयास करते हुए देश को आत्मनिर्भर बनाने एवं जनकल्याण करने के लिए सरकार की भावी प्राथमिकताओं और योजनाओं को धरातल पर उतारा है।यदि राजनीति सही और सकारात्मक दिशा में प्रयोग की जाये तो विकास के नए शिखर छुये जा सकते हैं।मानवता की सेवा की जा सकती हैऔर देश को निरंतर आगे बढ़ाया जा सकता है।

       राजनीति का मूल जनता के सामाजिक, आर्थिक कल्याण को अधिकतम करना है।धरातल पर बदलाव लाने के लिए राजनीति एक सशक्त माध्यम है।राजनीति के द्वारा हम समाज के दबे कुचले लोगों और उपेक्षित समुदायों को ऊपर उठाते हुए सामाजिक, आर्थिक विषमताओं को फर किया जा सकता है।एक व्यापक बदलाव लाने का जो कार्य बड़े से बड़े  वेतन वाली प्रतिष्ठित नौकरी करके भी नहीं किया जा सकता है उसे राजनीति के माध्यम से आसानी से किया जा सकता है।राजनीति सामाजिक न्याय के ऐसे बदलाव का सजग प्रहरी बना सकती है जो सभी मानव जाति के लिए आवश्यक है।

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