शिक्षा का अधिकार2009 में एक महत्वपूर्ण अधिनियम है जिसका उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना है।यह अधिनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत बच्चों के लिए शिक्षा को सुनिश्चित करता है-मनोज श्रीवास्तव (पैनल अधिवक्ता )
डुमरांव (बक्सर) : शिक्षा का अधिकार, संविधान को समझना,मौलिक अधिकार और कर्तव्य” विषय पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार बक्सर द्वारा जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष हर्षित सिंह एवं अवर न्यायाधीश सह सचिव नेहा दयाल के मार्गदर्शन में पैनल अधिवक्ता मनोज कुमार श्रीवास्तव एवं पीएलवी अनिशा भारती द्वारा +2 महारानी उषा रानी बालिका उच्च विद्यालय डुमरांव में आयोजित किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य सचिन्द्र तिवारी तथा संचालन रवि प्रभात द्वारा किया गया।मौके पर विशाल जायसवाल, चन्दन पाण्डे, कल्पना श्रीवास्तव, राजलक्ष्मी शर्मा, जितेन्द्र मिश्रा, रवि प्रभात के अलावे अन्य लोग रहे।
पैनल अधिवक्ता मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि शिक्षा का अधिकार2009 में एक महत्वपूर्ण अधिनियम है जिसका उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना है।यह अधिनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत बच्चों के लिए शिक्षा को सुनिश्चित करता है।शिक्षा का अधिकार बच्चों को उनके जीवन में आत्मनिर्भता,सोचने की क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाता है।शिक्षा का अधिकार अधिनियम न केवल बच्चों के लिए शिक्षा के दरवाजे खोलता है बल्कि यह समाज में समावेशिता और समानता को बढ़ावा देता है।यह सुनिश्चित करता है कि हर बच्चे को उनके अधिकारों के अनुसार शिक्षा मिले जिससे वे अपने भविष्य को बेहतर बना सके।
प्राचार्य सचिंद्र तिवारी ने कहा कि संविधान किसी देश का सर्वोच्च कानून होता है।यह देश की राजनीतिक व्यवस्था, सरकार की संरचना, शक्तियां और नागरिकों के अधिकारों को परिभाषित करता है।यह भारत को एक सम्प्रभु,समाजवादी, धर्मनिपेक्ष,लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित करता है जो अपने नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बन्धुत्व सुनिश्चित करता है।
पीएलवी अनिशा भारती ने बताया की गणराज्य भारत के संविधान के अनुसार शाषित है जिसे संविधान सभा द्वारा 26 नवम्बर 1949 को ग्रहण किया गया था जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।समानता,स्वतंत्रता, शोषण के खिलाफ, धार्मिक आजादी,सांस्कृतिक और शैक्षणिक, संवैधानिक उपचारों का अधिकार है
मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि मौलिक अधिकार और मौलिक कर्तव्य भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।ये नागरिकों के व्यक्तित्व विकास और देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाते हैं।मौलिक अधिकार संविधान के अनुच्छेद 12 से 35 में दिए गए हैं।ये अधिकार नागरिकों को सुरक्षा और जरूरी आजादी देते हैं।मौलिक कर्तव्य नागरिकों राष्ट्र की प्रगति और कल्याण के लिए जिम्मेदार बनाते हैं।ये कर्तव्य संविधान के अनुच्छेद 51(A) में दिए गए हैं।इनमें ये कर्तव्य शामिल हैं-संविधान का पालन करना, संविधान के आदर्शों,संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना।भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखना और उसकी रक्षा करना।

